चीन की अंडर-21 टीम को कोचिंग देंगे हिडिंक

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नीदरलैंड्स के निवासी गूस हीडिंक को चीन की अंडर-21 फुटबाल टीम का कोच नियुक्त किया गया है। चीन को टोक्यो ओलम्पिक खेलों में मार्गदर्शन देने के लक्ष्य से हीडिंक को यह जिम्मेदारी सौंपी गई है। चीनी फुटबाल महासंघ (सीएफए) ने सोमवार को इसकी पुष्टि की।

समाचार एजेंसी एफे की रिपोर्ट के अनुसार, 2020 में होने वाले ओलम्पिक खेलों में क्वालीफाई करने के लक्ष्य से यह कदम उठाया गया है। चीन ने 2008 के बाद से ओलम्पिक खेलों में फुटबाल के लिए क्वालीफाई नहीं किया है।

इसके साथ ही महासंघ का यह भी कहना है कि चीन की अंडर-21 टीम को एएफसी अंडर-23 एशियाई कप 2020 के शीर्ष तीन में भी स्थान हासिल करना होगा।

इस टूर्नामेंट में एशिया की 16 टीमें हिस्सा लेंगी। यह टूर्नामेंट हर दो साल के अंतराल में आयोजित होता है।

हिडिंक ने एक कोच के तौर पर अपने करियर में पीएसवी इंडहोवन, रियल मेड्रिड और अन्य क्लबों को प्रशिक्षित किया है।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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