यहां पति खुद कराता है पत्नी से देह व्यापार, परंपरा के नाम पर होती है हैवानियत !

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आज भी हमारे देश मे ऐसी कई पंरपराएं मौजूद है जिनका हमारे ​जीवन में कोई महत्व नहीं हैं मगर आज भी कई जगहों पर इन परंपराओं के नाम पर लोगों के साथ में हैवानियत का काम होता हैं । कुछ ऐसा ही आज हम आपको बताने जा रहे हैं ।

बता दें कि ऐसा ही एक समुदाय देश की राजधानी दिल्ली में रहता है जहां पर परंपराओं के नाम पर खुद पति ही अपनी पत्नी को देह व्यापार में धकेल देता है और यदि महिला के द्वारा इस काम को करने से मना किया जाता है तो उस पर जुल्म किया जाता है। ये समुदाय दिल्ली के नजफगढ़, प्रेमनगर और धर्मशाला में रहता है। आपको बता दें कि इस समुदाय को परना समुदाय के नाम से जाना जाता है.

यहां पर जब भी किसी समुदाय मे लड़की का जन्म होता है तो उसके बाद जश्न मनाया जाता है । लड़कियां जब तक कुंवारी रहती है परिवार वाले उसे बेच देते हैं मगर शादी के बाद उसका पति भी उसके साथ कुछ ऐसा ही करता है । यहां पर महिलाओं को पैसा कमाने का जरिया माना जाता है।

बता दें कि, इस समुदाय में लड़कियों को ज्यादा पढ़ाया-लिखाया नहीं जाता, जैसे ही बेटी जवान होती है तो पूरा परिवार उसे देह व्यापर में धकेल देता है।

 


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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