यहां चूहे खाकर गुजारा कर रहे लोग, रोजाना लड़ते हैं भूख से, हार जाने पर हो जाती है मौत, सच्चाई जानकर चौंक जाओंगे

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जयपुर, हमारे देश मे सितंबर माह में नेशनल न्यूट्रीशन डे मनाया जाता है। जो जो हाल ही में निकला है। साथ ही कहा जाता है कि भारत में कोई भी इंसान कुषोषण से ग्रसित नहीं है  लेकिन दोस्तों हकीकत तो कुछ और ही बया करती है।  उत्तर प्रदेश के रक्बा दुलमा पट्टी गांव के हालात भारत की इन खोखली योजनाओँ की पोल खोलने के लिए काफी है। यहां पर लोग भूख की वजह से जान गंवाने पर मजबूर हो रहे हैं।

लेकिन सरकार को यह दिखाई ही नहीं देता है। सराकार की ओर से इन लोगों की सहायाता के लिए कोई कदम नहीं उठाए गए हैं। सूत्रों से मिली जानकारी के अऩुसार यहां रहने वाले वीरेंद्र के परिवार को इसका दंश झेलना पड़ा है। पिछले 6 सितंबर को उसकी 30 वर्षीय पत्नी और 7 वर्षीय बेटे की भूख से मौत हो गई। इतना ही नहीं  पांच दिन पहले ही उसने अपनी दो महीने की बेटी को भी खो दिया है।

बता दें कि ये लोग मुसहर जाति के है। जो वहां का एक दलित समुदाय है। यहां के लोग खाने के लिए महज चूहों पर निर्भर रहते है। बदलते दौर में भी इन लोगों की स्थिति ऐसी हही बनी हुई है। वहीं सरकार का दावा है कि इन लोगं की मौत भूख से नहीं हुई है। बता दें कि इन परिवारों की आबादी करीब ढाई लाख के आसपास है। इस गांव का नाम किरकिया है।

यहां रहने वाली एक महिला सोनवा देवी के घर में कुछ अनाज मिला है उसका कहना है कि उसके 22 वर्षीय बेटे की मौत के बाद उसके घर में सराकर की तरफ से अनाज आया है। हालांकि चिकित्सकों के आंकड़ो के अनुसार इनकी मौत डायरिया से हुई है। जबकि इनका कहना है कि इनके परिवार के लोग भूख से मरे है।

 

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