एईएस पर सर्वोच्च न्यायालय में जनहित याचिका पर सोमवार को सुनवाई

0
26

सर्वोच्च न्यायालय ने बिहार के मुजफ्फरपुर जिले में एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम(एईएस) को फैलने से रोकने के मद्देनजर सहायता और समीक्षा के लिए एक मेडिकल पेशेवरों की टीम वहां भेजने के लिए केंद्र को आदेश देने के मामले में एक जनहित याचिका पर सुनवाई करने पर सहमति जताई। इस बीमारी की वजह से उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में पहले 128 बच्चों की जान जा चुकी है। सर्वोच्च न्यायालय की एक अवकाश पीठ ने मामले की सुनवाई के लिए सोमवार का दिन तय कर दिया।

याचिका दो अधिवक्ताओं मनोहर प्रताप और सनप्रीत सिंह अजमानी ने दाखिल की है। दोनों ने अपनी याचिका में कहा है कि केंद्र और राज्य सरकार को एकसाथ स्थिति से निपटने के लिए जरूरी मेडिकल पेशेवरों के साथ तत्काल 500 आईसीयू की व्यवस्था करनी चाहिए।

याचिका में कहा गया है कि सरकारी अधिकारियों के लापरवाह दृष्टिकोण की वजह से यह स्थिति पैदा हुई है, क्योंकि उन्होंने इस बीमार से हर वर्ष बच्चों की मौतों को नजरअंदाज किया।

याचिकाकर्ताओं ने मामले में सर्वोच्च न्यायालय से हस्तक्षेप करने की मांग करते हुए कहा, “सैकड़ों की तादाद में बच्चे दवाइयों, समुचित देखभाल, क्षेत्र के अस्पतालों में आईसीयू के अभाव की वजह से मर रहे हैं।”

याचिका में डॉक्टरों की हालिया हड़ताल को संदर्भित करते हुए कहा गया है कि यह संयोग से बीमारी के फैलने के दौरान हुआ, जिससे सरकारी अस्पतालों में भर्ती रोगियों की देखभाल प्रभावित हुई।

याचिकाकर्ताओं ने कहा कि राज्य सरकार को प्रत्येक मृतक बच्चे के परिवारों को 10-10 लाख रुपये की सहायता राशि देनी चाहिए।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


SHARE
Previous articleसंघीय व्यवस्था के खिलाफ है ‘एक देश, एक चुनाव’ : माकपा
Next article21 जून की सुबह होगी प्रेमयोग की शुरूआत, इन 6 राशियों को मिलेगा सच्चा प्यार
बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here