IIHMR University में संपन्न हुआ हेल्थ नेक्स्ट 2021

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आईआईएचएमआर यूनिवर्सिटी में संपन्न हुई 2 दिवसीय ग्लोबल हैल्थ एंड इनोवेशन कॉन्फ्रेंस ‘हेल्थ नेक्स्ट 2021’ में विषेषज्ञों ने इस विषय से जुड़े विविध पहलुओं, चिंताओं, चुनौतियों व बदलावों पर चर्चा की। कॉन्फ्रेंस में अमेरिका, जर्मनी, भारत, ब्रिटेन, कनाडा सहित 8 देशों के करीब 40 वक्ताओं ने अपने विचार व्यक्त किए। इन वक्ताओं ने नए समाधानों व रणनीतियों पर जोर दिया और नेटवर्किं ग के जरिए व्यापारिक आदान-प्रदान भी किया गया। एनएचएम के पूर्व प्रबंध निदेशक तथा राजस्थान सरकार के कौशल व उद्यमिता के पूर्व सचिव एवं खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामलों के सचिव नवीन जैन ने कॉन्फ्रेंस के मुख्य वक्ता के तौर पर उद्घाटन किया और कॉन्फ्रेंस को संबोधित किया। इसमें बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन, बायर, जर्मनी, फार्मेसी, अपोलो हॉस्पिटल्स, मेडकॉर्डर्स, दवा दोस्त, मेडिकवर हॉस्पिटल्स, एस्ट्राजेनेका, बायो फार्मास्युटिकल आर एंड डी, गेदर्सबर्ग, एमडी, यूएसए, डॉक्यूटी इंडिया, विवेवो हेल्थ, एआई हाईवे, माइरेस्क्विर लाइफ, टाई ग्लोबल, एमिटी सेंटर फॉर एंटरप्रिन्योरशिप डेवलपमेंट,स्टार्टअप ओएसिस, हेल्थकेयर एट होम इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, ई फॉर इम्पेक्ट फाउंडेशन, ईकोवेयर, बीओडी, आईक्योर, स्टेन प्लस, रेड एंबुलेंसेज और दया इंडिया जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों के वक्ता शामिल हुए।

आईआईएचएमआर यूनिवर्सिटी के प्रेसीडेंट (कार्यवाहक) व डीन डॉ. पी आर सोडानी ने कहा कि हमें लगता है कि स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र की चुनौतियां अब बदल गई हैं और कोविड-19 के बाद इन चुनौतियों व जोखिमों को कम करना अत्यंत आवश्यक हो गया है। जैसे-जैसे हम आगे बढ़ रहे हैं, हम हेल्थकेयर इंडस्ट्री को नया व बेहतर करने के शानदार प्रयास देख रहे हैं। ग्लोबल हेल्थ एंड इनोवेशन कॉन्फ्रेंस ‘हेल्थ नेक्स्ट 2021’ न सिर्फ नए एंटरप्रिन्योर्स के लिए, बल्कि पूरे स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए बेहतरीन मंच है।

हेल्थकेयर एट होम इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के ईवीपी व सीओओ डॉ. गौरव ठुकराल ने कहा कि अफॉर्डेबिलिटी, अवेलेबिलिटी व असेसबिलिटी तीन ए हैं, जो स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में हमेशा से चुनौती रहे हैं। आयुष्मान भारत के बावजूद स्वास्थ्य सेवाओं का शायद ही कोई प्रतिशत राज्य द्वारा वित्तपोषित किया जाता हो। हम देखते हैं कि बीमा की पहुंच अभी तक कम है।

ई फॉर इम्पेक्ट फाउंडेशन के सीईओ प्रो. मारियो मोल्तेनी ने सार्वजनिक स्वास्थ्य एवं निजी स्वास्थ्य में संतुलन को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया।

ईकोवेयर के सीईओ रेहा मजूमदार सिंघल ने कहा कि भारत में घनी आबादी है और हमारे पास वेस्ट मैनेजमेंट व वेस्ट ट्रीटमेंट का अभी भी कोई औपचारिक समाधान नहीं है। मैं मानता हूं कि जब हम भारत या किसी भी दक्षिण पूर्व एशियाई देशों में सस्टेनेबिलिटी की बात करते हैं तो हमें क्लोज्ड लूप सॉल्यूशंस की बात करनी होगी।

अपोलो हॉस्पिटल्स के सीओओ और यूनिट हेड संतोष मराठे ने कहा कि पर्सनलाइज्ड हेल्थकेयर मौजूदा समय की जरूरत है। उन्होंने कहा कि पेशेंट का उपयुक्त डेटा प्राप्त करने के लिए तकनीक का उपयोग फायदेमंद हैं। बीओडी के संस्थापक व मैनेजिंग पार्टनर सौरभ उबेजा ने कहा कि विशेष रूप से पेशेंट्स का हाई क्वालिटी डेटा संग्रह उनके उपचार का प्रोटोकॉल तैयार करने में मदद कर सकता है।

मेडकोर्डस के सह-संस्थापक श्रेयांष मेहता ने कहा कि राजस्थान में बीते 6 सालों में निजी स्वास्थ्य सेवाओं ने एक बड़ा बदलाव देखा है। हमारा प्रयास है कि नेशनल डिजिटल हेल्थ मिशन से जुड़े प्रत्येक परिवार और उसके प्रत्येक सदस्य का स्वास्थ्य रिकॉर्ड बने।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस

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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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