गुरु नानक जयंती समारोह पर झूठ बोलना बंद करें हरसिमरत बादल : मुख्यमंत्री

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पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने सोमवार को कहा कि शिरोमणि अकाली दल (शिअद) नेता हरसिमरत बादल झूठ बोलकर बाबा गुरु नानक देव की 550वीं जयंती का उपयोग अपने राजनीतिक लाभ के लिए करने से बाज आएं। मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्रीय मंत्री पवित्र अवसर के महत्व को कम कर इसे झूठ और धूर्तता की दुखद गाथा बनाने की कोशिश कर रही हैं।

उन्होंने कहा कि हरसिमरत शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) को प्रदेश स्तरीय समारोह में मदद करने के लिए कहने के बजाए सरकार और धार्मिक संगठन के बीच अड़चन पैदा कर रही हैं।

सिंह ने कहा कि उनके हालिया बयान से फिर उनकी पार्टी की तुच्छ मानसिकता और बाधा पैदा करने वाले राजनीतिक एजेंडा की पोल खुल गई है।

उन्होंने कहा कि शिअद के नेताओं ने 10 साल तक प्रदेश के हर सामाजिक व आर्थिक ताने-बाने को नष्ट करने की कोशिश की और अब वे फिर असंवदेनशील और विवादास्पद बयान देकर प्रदेश को अंधकार के दिनों में ले जाना चाहते हैं।

प्रदेश में शुरू की गई विकासपरक पहलों का जिक्र करते हुए सिंह ने कहा कि पवित्र शहर सुलतानपुर लोधी में 12 नवंबर को होने वाले मुख्य समारोह के कार्यक्रमों को अंतिम रूप दे दिया गया है।

न्यूज स्त्रेात आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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