हरिचंदन बने आंध्र प्रदेश के राज्यपाल

0
239

बिस्वा भूषण हरिचंदन ने बुधवार को आंध्र प्रदेश के राज्यपाल के तौर पर शपथ ली। आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश सी. प्रवीण कुमार ने यहां राजभवन में आयोजित एक समारोह में नए राज्यपाल को शपथ दिलाई।

इस समारोह में मुख्यमंत्री वाई.एस. जगन मोहन रेड्डी और उनके मंत्रिमंडलीय सहयोगियों के साथ-साथ वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया।

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के एक वरिष्ठ नेता और ओडिशा के पूर्व मंत्री हरिचंदन 2014 में राज्य के विभाजन के बाद आंध्र प्रदेश के पहले पूर्णकालिक राज्यपाल हैं।

इनसे पहले 2009 से अविभाजित आंध्र प्रदेश के राज्यपाल ई.एस.एल. नरसिम्हन राज्य के विभाजन के बाद भी दोनों राज्यों- आंध्र प्रदेश व तेलंगाना के राज्यपाल के रूप में कार्य कर रहे थे।

नरसिम्हन हैदराबाद से दोनों राज्यों के राज्यपाल का पदभार संभाल रहे थे।

विजयवाड़ा में मुख्यमंत्री के शिविर कार्यालय के तौर पर इस्तेमाल की जाने वाली एक सरकारी इमारत को अस्थायी राजभवन बना दिया गया है।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


SHARE
Previous articleउमस के कारण निकाल रही है जान तो अपनाएं यह तरीके जो रखेंगे आपका ख्याल
Next articleबांग्लादेश के साथ पहले मैच के बाद वनडे से संन्यास लेंगे मलिंगा
बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here