फ्रेंडशिप डे स्पेशल: पौराणिक कथाओं से जानिए मित्रता का महत्व

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2 अगस्त यानी की कल फ्रेंडशिप डे मनाया जाएगा। ये दिन दोस्ती का दिन माना जाता हैं इस दिन सभी अपने दोस्तों को गिफ्ट देते हैं मित्रता क्या हैं ये हम सब प्राचीन काल की कथाओं से सीख सकते हैं। तो आज हम आपको कुछ कहानियां के अनुसार बताने जा रहे हैं कि सच्ची मित्रता क्या होती हैं, तो आइए जानते हैं फ्रेंडशिप डे स्पेशल से जुड़ी कुछ पौराणिक कहानियां।

द्वापर युग में भगवान कृष्ण अपनी नगरी द्वारका में राज कर रहे थे। वही सुदामा अपनी पत्नी और बच्चों के साथ भिक्षा मांगकर अपना जीवन जी रहे थे। एक बार उनकी पत्नी ने कहा कि वो जाकर श्रीकृष्ण से मिलकर आए। मगर सुदामा के पास उन्हें देने के लिए कुछ भी नहीं था। इसलिए उन्होंने मना कर दिया। सुदामा की पत्नी ने पड़ोस से थोड़े चावल बांधकर सुदामा को दे दिए और इन्हें श्रीकृष्ण को भेट करने के लिए कहा। चावल लेकर जब सुदामा श्रीकृष्ण के महल जाने लगे तो उसने लोगों से श्रीकृष्ण के महल का मार्ग पूछा। जब लोगों ने उनसे पूछा की वो कौन हैं तो सुदामा ने बताया कि वो श्रीकृष्ण के मित्र हैं। यह सुनकर सभी हंसने लगे। लोगों की बातें सुनकर वह जैसे तैसे श्रीकृष्ण के महल तक पहुंच गए। मगर वहां भी द्वारपालों ने उनका तिरस्कार किया। इसके बाद सुदामा ने द्वारपालों से कृष्ण से मिलने के लिए कहा और उनका संदेश भी देने को कहा। जब द्वारपाल ने सुदामा का संदेश श्री कृष्ण तक पहुंचाया और सारा किस्सा सुनाया तो भगवान कृष्ण बिना मुकुट और नगें पैर ही सुदामा से मिलने पहुंच गए। मगर सुदामा को लग रहा था कि कृष्ण उससे नहीं मिलेंगे क्योंकि वो गरीब हैं मगर जैसे ही कृष्ण अपने मित्र से मिले उन्होंने सुदामा को गले लगा लिया। जब कृष्ण अपने मित्र से मिले तो उनसे न मिलने की बात पूछी तो सुदामा ने उन्हें सब बता दिया। तब श्रीकृष्ण ने कहा कि सुदामा आज भी उनके लिए वहीं मित्र है जो पहले था। दोस्ती एक ऐसा रिश्ता हैं जो सभी रिश्तों से उपर होता हैं।

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