हनुमा बने 292वें भारतीय टेस्ट खिलाड़ी

0
97

यहां शुक्रवार से इंग्लैंड के खिलाफ ओवल मैदान पर खेले जा रहे पांचवें और आखिरी टेस्ट मैच के लिए अंतिम एकादश में शामिल किए गए मध्यक्रम बल्लेबाज हनुमा विहारी भारत के 292वें टेस्ट खिलाड़ी बन गए हैं। आंध्र प्रदेश के रहने वाले हनुमा को कप्तान विराट कोहली ने मैच शुरू होने से पहले कैप सौंपकर भारतीय टीम में स्वागत किया। हनुमा को हरफनमौला खिलाड़ी हार्दिक पांड्या के स्थान पर टीम में शामिल किया गया है।

19 साल बाद आंध्र का कोई खिलाड़ी भारतीय टेस्ट टीम में पदार्पण कर रहा है। हनुमा से पहले आंध्र के एमएसके प्रसाद ने भारतीय टेस्ट टीम में पदार्पण किया था। प्रसाद इस समय राष्ट्रीय चयनकर्ता प्रमुख हैं।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


SHARE
Previous articleएक ऐसा देश जहां महिलाएं करती हैं कंडोम का इस्तेमाल, सरकार भी देती है भारी छूट
Next articleओवल टेस्ट : चायकाल तक भारत ने बनाए 1 विकेट 53 रन
बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here