कश्मीर पर बनी ‘हाफ विडो’ 6 जनवरी को रिलीज होगी

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कई फिल्म फेस्टिवल में हिस्सा लेने के बाद एलए-आधारित कश्मीरी फिल्म निर्माता दानिश रेनजू की ‘हाफ विडो’ अब 6 जनवरी को भारत में एक सीमित थिएट्रिकल रिलीज के लिए तैयार है। फिल्म की कहानी कश्मीर के श्रीनगर की एक महिला के इर्द-गिर्द घूमती है। उसके पति को कथित तौर पर भारतीय सशस्त्र लोगों द्वारा अपहरण कर लिया जाता है।

फिल्म में नीलोफर हामिद, शाहनवाज भट, मीर सरवर और हसीना सोफी प्रमुख भूमिकाओं में हैं। अमेजन प्राइम वीडियो में फिल्म ‘हाफ विडो’ को देखा जा सकता है, वह पहले से ही प्लेटफॉर्म पर मौजूद है। यह उर्दू-कश्मीरी भाषा की फिल्म है।

फिल्म का शीर्षक ‘हाफ विडो’ जिनके पति गायब हो गए हैं, उन कश्मीरी महिलाओं के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले नाम के शब्द को संदर्भित करता है। इसमें से ज्यादातर कश्मीर संघर्ष के दौरान सुरक्षा बलों की हिरासत में थे।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस

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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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