अगर दुनिया का नेतृत्व युवाओं द्वारा होता, तो यह बेहतर जगह होती : सदगुरु

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आध्यात्मिक गरु और लेखक सदगुरु युवाओं की क्षमता में विश्वास रखते हैं। उन्होंने कहा, “युवाओं में बहुत अधिक क्षमता होती है। अगर हम समग्र रूप से मानवता के साथ पहचान करने के लिए उन्हें प्रेरित कर सकें तो दुनिया पर इसका प्रभाव जबरदस्त होगा।”

उन्होंने आगे कहा, “यदि दुनिया का नेतृत्व युवाओं द्वारा होता तो यह एक बेहतर जगह होती। युवा अधिक जिंदादिल, ऊर्जावान और आदर्शवादी होते हैं।”

इस बीच, ईशा फाउंडेशन के साथ हाथ मिलाकर बिग एफएम की तरफ से एक इंटरैक्टिव सेशन का आयोजन किया जा रहा है, जिसका नाम ‘अनलॉकिंग पॉजिटिविटी’ है। इसे 10 अगस्त से 15 अगस्त तक प्रसारित किया जाएगा, जिसमें पद्म विभूषण प्राप्तकर्ता योगी इंसान के व्यक्तिगत, भावनात्मक और मानसिक जीवन से संबंधित विषयों पर बात करेंगे।

वह जारी महामारी, प्रेम और संबंध, सोशल मीडिया पर ट्रोलिंग और देशभक्ति सहित और भी कई विषयों पर बात करेंगे।

नयूज स्त्रोत आईएएनएस

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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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