जिमनास्ट बाइल्स ने ‘मी टू’ के तहत बयां की यौन उत्पीड़न की कहानी

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दुनिया भर में चल रहे ‘मी टू’ अभियान (यौन उत्पीड़न के खिलाफ अभियान) की शुरुआत होने के बाद अब खेल जगत भी इसकी चपेट में आ गया है। अमेरिका की महिला जिमनास्टिक सिमोन बाइल्स ने अपने साथ हुए यौन उत्पीड़न की कहानी बयां की है। चार बार की ओलम्पिक चैम्पियन बाइल्स ने कहा है कि वह भी जिमनास्टिक टीम के डॉक्टर लैरी नासर द्वारा यौन उत्पीड़न का शिकार हुई थी और अब इसके बारे में बात करने से उन्हें राहत और मजबूती मिलती है।

बीबीसी की रिपोर्ट के अनुसार, बाइल्स उन 160 महिलाओं में शामिल हैं जिनका कि नासर ने यौन उत्पीड़न किया था। नासर को इस वर्ष जनवरी में 175 साल तक की सजा हुई थी।

21 वर्षीय बाइल्स ने कहा, “यह बहुत मुश्किल था, लेकिन मुझे लगा कि अगर मैं अपनी कहानी बता सकती हूं तो इससे अन्य लोग भी अपनी-अपनी कहानी को बताने के लिए प्रोत्साहित होंगे।”

वर्ष 2016 में रियो ओलम्पिक में चार स्वर्ण और एक कांस्य पदक जीत चुकीं बाइल्स ने कहा, “मैं उन कई पीड़ितों में से एक हूं जिनका नासर ने यौन शोषण किया। मैं हाल के दिनों में टूट-सी गई हूं। मैं जितना अपनी आवाज दबाने की कोशिश करती हूं उतना मेरा दिमाग चीखने को कहता है। मैं अब अपनी कहानी कहने से डरूंगी नहीं।”

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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