गुरमीत राम रहीम को मृत्युदंड मिलना चाहिए : अंशुल छत्रपति

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पत्रकार रामचंद्र छत्रपति के बेटे अंशुल छत्रपति ने शुक्रवार को डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम के लिए मृत्युदंड की मांग की। पत्रकार रामचंद्र छत्रपति की डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम के करीबी सहयोगियों ने हत्या कर दी थी।

पंचकूला स्थित केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की विशेष अदालत ने डेरा प्रमुख गुरमीत राम रहीम व तीन अन्य को पत्रकार रामचंद्र छत्रपति की हत्या मामले में दोषी करार दिया।

इस पर प्रतिक्रिया देते हुए छत्रपति के बेटे अंशुल छत्रपति ने मीडिया से कहा, “इस तरह का व्यक्ति हमारे समाज में रहने लायक नहीं है। हमारी मांग है कि उसे (गुरमीत राम रहीम) मौत की सजा दी जाए।”

अंशुल ने कहा, “बीते 16-17 सालों से उम्मीद लगाए हैं कि हमे न्याय मिलेगा। हमें लंबे समय तक जूझने के बाद आज न्याय मिला है।”

अंशुल ने कहा, “हमें बहुत सारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा है और बहुत कष्ट उठाने पड़े हैं, क्योंकि वह (गुरमीत राम रहीम) बहुत ज्यादा शक्तिशाली था। हम सीबीआई टीम का आभार जताते हैं कि उसने मामले की जांच की और हमारा समर्थन किया। इस व्यक्ति को मौत की सजा मिलनी चाहिए।”

सीबीआई अदालत 17 जनवरी को पत्रकार रामचंद्र छत्रपति मामले में सजा का ऐलान करेगी।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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