गोयल व 13 लाख रेलवे कर्मचारी पीएम केयर्स फंड में देंगे 151 करोड़ रुपये

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कोरोनावायरस महामारी से लड़ने के लिए प्रधानमंत्री मोदी द्वारा देशवासियों से की गई अपील के बाद रेलमंत्री पीयूष गोयल ने कहा है कि वे और सभी रेलवे कर्मचारी पीएम केयर्स फंड में 151 करोड़ रुपये योगदान देंगे।

एक ट्वीट में गोयल ने कहा, “प्रधानमंत्री जी के आह्वान का अनुसरण करते हुए मैं और रेल राज्य मंत्री सुरेश अंगाड़ी अपनी एक महीने की तनख्वाह और 13 लाख रेलवे और पब्लिक सेक्टर अंडरटेकिंग कर्मचारी अपने एक दिन की तनख्वाह पीएम केयर्स फंड को दान करेंगे, जो 151 करोड़ रुपये होगा। मैं सहकर्मियों का आभारी हूं और हम सभी प्रार्थना करते हैं कि हमारा देश सुरक्षित और स्वस्थ रहे।”

मोदी ने कोविड-19 महामारी की तरह किसी भी प्रकार की आपातकालीन या संकट की स्थिति से निपटने के प्राथमिक उद्देश्य के साथ शनिवार को पीएम केयर्स का शुभारंभ किया।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस

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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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