सरकार को संकट में ‘चेहरा छिपाने’ का मौका मिला है : Shashi Tharoor

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कोविड-19 महामारी से निपटने में ‘कुप्रबंधन’ के लिए केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए, कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने केंद्र से अपने कामकाज में और अधिक पारदर्शिता लाने और इस मामले में की गई ‘गलतियों’ को पहचान कर उसे दूर करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि सरकार को संकट में ‘अपना चेहरा छिपाने’ का मौका मिला है। चल रहे मानसून सत्र के दौरान महामारी पर नियम 193 के तहत एक चर्चा पर लोकसभा में बोलते हुए, तिरुवनंतपुरम के सांसद ने देश के युवाओं को यह भी आश्वासन दिया कि संसद उनके साथ रहेगी और साथ ही उनके अच्छे भविष्य के लिए बहस जारी रखेगी।

सरकार को निशाने पर लेते हुए, थरूर ने कहा कि सरकार को संकट में ‘अपना चेहरा छिपाने’ का मौका मिला है।

उन्होंने कहा, “मैं इस सरकार से आग्रह करता हूं कि वह अपने कामकाज में और अधिक पारदर्शी बने, जैसे कि विशेषज्ञों के लिए डेटा एकत्र करना और जारी करना। इसके अलावा कोई कार्रवाई करने से पहले सभी हितधारकों के साथ परामर्श करना और अंतत: इस राष्ट्र को विश्वास में लेना, क्योंकि देश आप पर विश्वास खो रहा है।”

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के आंकड़ों का हवाला देते हुए, थरूर ने कहा कि शनिवार को भारत में कोरोनावायरस के 93,337 मामले सामने आए हैं, जबकि इसी दौरान अमेरिका में 42,628 मामले सामने आए। मौतों के मामलों में भी भारत में रोजाना सबसे ज्यादा मौतें हो रही हैं।

चर्चा के दौरान बोलते हुए उन्होंने कहा, “यह इस समय की एक दर्दनाक सच्चाई है, जिसमें हम रहते हैं और हमें ये याद दिलाता रहता है कि इस सदन में समय निकालना और इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर चर्चा करना हमारे लिए कितना महत्वपूर्ण है।”

देशभर में पिछले छह महीनों में क्या हुआ, यह बताते हुए, सांसद थरूर ने कहा कि जनवरी में ही इसके अच्छे खासे संकेत मिल गए थे।

थरूर ने कहा, “.. 30 जनवरी तक, विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कोविड-19 वायरस को एक सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल के रूप में घोषित किया था, एक घोषणा जो संयोगवश उसी दिन आई थी जिस दिन भारत में कोरोनावायरस का पहला मामला दर्ज हुआ था।”

“जब यह सरकार इस महामारी पर कोई ठोस प्रतिक्रिया देने में विफल रही, तो मेरे सहयोगी और इस सदन के सदस्य राहुल गांधी ने 12 फरवरी को ट्वीट किया और सार्वजनिक रूप से सरकार को चेतावनी दी कि कोरोनोवायरस हमारे लोगों के लिए एक अत्यंत गंभीर खतरा है।”

थरूर ने राहुल गांधी के हवाले से कहा कि “मेरी समझ से सरकार इस खतरे को गंभीरता से नहीं ले रही है। समय पर कार्रवाई महत्वपूर्ण है।”

“जब सरकार ने अहमदाबाद में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के स्वागत में भीड़ की मेजबानी के लिए इसे नजरअंदाज किया, तो कांग्रेस ने फिर 3 मार्च और 5 मार्च को सरकार को इसके बारे में बताया। मुझे खेद है कि सरकार द्वारा फिर उपेक्षा की गई है, जो कि पक्षपातपूर्ण राजनीति को दर्शाता है।”

थरूर ने आगे कहा कि सरकार रचनात्मक बातचीत के पक्ष में कभी नहीं रही। उन्होंने कहा, “सरकार से मैं कहना चाहता हूं कि वो अपनी गलतियों को पहचाने और उसे दूर करने का प्रयास करे। इसके लिए अभी भी समय है।”

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस

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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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