‘सरकार ने एमएसपी निर्धारण में अपना वादा नहीं निभाया’

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नर्मदा बचाओ आंदोलन से जुड़े कार्यकर्ताओं ने केंद्र सरकार द्वारा खरीफ फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में वृद्धि पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपने वादे के मुताबिक एमएसपी में बढ़ोतरी नहीं की है। नर्मदा बचाओ आंदोलन की ओर से गुरुवार को जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया कि मध्य प्रदेश समेत कई राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनावों से पूर्व सरकार ने एमएसपी में बढ़ोतरी की घोषणा की है जो निश्चित तौर पर चुनावी हित साधने की दिशा में एक कदम है।

सामाजिक कार्यकर्ताओं ने सरकार से सवाल किया कि स्वामीनाथन आयोग की सिफारिश के अनुसार, कृषि लागत के फॉर्मूले सी-2 पर एमएसपी का निर्धारण क्यों नहीं किया गया। उन्होंने पूछा, “रबी के फसल के दाम भी क्यों नहीं बढ़ाए गए? दूध, सब्जियों, पहाड़ी क्षेत्र में उगने वाली फसलों के एमएसपी का निर्धारण क्यों नहीं किया गया? क्या एमएसपी में यह बढ़ोतरी लागत का डेढ़ गुना है?”

सामाजिक कार्यकर्ताओं ने कहा कि ज्यादातर फसलों का एमएसपी लागत पर 50 प्रतिशत लाभ देने वाला मूल्य नहीं है। कई फसलों का एमएसपी लागत पर 20 या 25 प्रतिशत या उससे भी कम लाभ देने वाला है।

उन्होंने कहा, “2014 के चुनाव से पहले घोषणापत्र में भारतीय जनता पार्टी और स्वयं प्रधानमंत्री मोदी ने स्वामीनाथन आयोग की सिफारिश के अनुसार, किसानों को उनकी फसलों का एमएसपी देने का आश्वासन दिया था जो पूरा नहीं हुआ।”

उन्होंने पूछा, “किसानों की कर्जमाफी को लेकर पिछले चुनाव की घोषणा को नजरंदाज करते हुए मोदी शासन चुप क्यों है?”

नर्मदाओ बचाओ आंदोलन से जुड़े इन कार्यकर्ताओं में मेधा पाटकर, देवेन्द्र तोमर, पेमा भाई भिलाला, जगदीश पटेल, सनोबर मंसूरी, सुरेश पाटीदार और राहुल यादव शामिल हैं।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस

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