सरकार राफेल सौदे को जायज ठहराने का रास्ता अभी तक नहीं ढूढ़ पाई : राहुल

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कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने बुधवार को राफेल सौदे को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर एक बार फिर निशाना साधा और कहा कि ‘उनके निर्णय को जायज ठहराने के रास्ते अभी तक नहीं ढूढ़े जा सके हैं।’ राहुल ने यह बात ऐसे समय में कही है, जब सर्वोच्च न्यायालय ने राफेल सौदे पर निर्णय लेने की प्रक्रिया के संबंध में सरकार से जानकारी मांगी है।

राहुल ने ट्वीट किया, “सर्वोच्च न्यायालय ने राफेल पर निर्णय लेने की प्रक्रिया के बारे में पूछा है। यह वास्तव में बहुत सरल है..”

उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री ने निर्णय लिया। उनके निर्णय को सही ठहराने की प्रक्रिया ढूढ़ी जानी अभी बाकी है। लेकिन काम शुरू हो चुका है। इसके संबंध में रक्षामंत्री फ्रांस जा रही हैं।”

राहुल की अगुवाई में कांग्रेस लगातार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर वर्ष 2015 में भारत-फ्रांस अंतरसरकारी समझौते के तहत फ्रांस से 36 राफेल विमान खरीदने की ‘एकतरफा’ घोषणा के संबंध में निशाना साध रही है।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस राहुल गांधी, राफेल सौदा, हिंदी समाचार

 


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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