गूगल प्ले स्टोर ने पेडे लोन एप्स को बंद किया

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हिंसक लोन से बेहतर तरीके से निपटने के लिए गूगल ने प्ले स्टोर से उन एप्स को हटा दिया है, जो भ्रामक और हानिकारक प्रचार के जरिए 36 प्रतिशत की वार्षिक दर या उससे अधिक दर पर पर्सनल लोन दे रहे थे, जैसे पेडे लोन्स। एनगैजेट ने रविवार को द वॉल स्ट्रीट जर्नल के हवाले से कहा कि एक प्रवक्ता ने बताया कि विस्तारित वित्तीय नीति इस वर्ष की शुरुआत से लागू की गई थी और ऐसा ‘शोषकों’ से यूजर (ग्रहकों) की रक्षा करने के लिए किया गया था।

फैसले से प्रभावित हुए करदाता टेक दिग्गज कंपनी के फैसले से खुश नहीं हैं।

यह नियम या तो उन्हें कम दरें करने या पूरी तरह से झुकाने का कार्य करते हैं।

रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि ऑनलाइन लेंडर्स अलायंस के सीईओ मैरी जैक्सन ने बार-बार कहा कि कंपनियों के व्यवहारों को अनुमति दी गई थी।

उन्होंने तर्क देते हुए कहा कि प्रतिबंध ‘वैध ऑपरेटरों’ के साथ-साथ उन ग्राहकों को भी नुकसान पहुंचा रहा है, जो ‘वैध ऋण’ की तलाश में है।

न्यूज सत्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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