गोगादेव नवमी 2020: भक्ति भाव के साथ मनाया जाता है यह पर्व, जानिए गोगा नवमी का महत्व

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गोगादेव नवमी विशेष त्योहारों में से एक माना जाता हैं वही वाल्मीकि समाज के आराध्य देव वीर गोगादेवजी महाराज का जन्मोत्सव हर साल गोगा नवमी के रूप में मनाया जाता है इस दिन वाल्मीकि समाज के लोग परंपरागत श्रद्धा भक्ति और हर्षोल्लास के साथ यह पर्व मनाते हैं इस बार यह त्योहार आज यानी 13 अगस्त को मनाया जा रहा हैं इस त्योहार को खासतौर पर मध्यप्रदेश, छत्तीसढ़ और राजस्थान में मनाया जाता हैं इसे गुग्गा नवमी भी कहते हैं। तो आज हम आपको इस त्योहार का महत्व बताने जा रहे हैं तो आइए जानते हैं।

भाद्रपद मास की कृष्ण पक्ष की नवमी तिथि यानी 13 अगस्त को यह त्योहार मनाया जा रहा हैं इस तिथि को गोगा नवमी के नाम से जानते हैं इस दिन गोगा देव यानी श्री जाहरवीर का जन्मोत्सव मनाया जाता हैं इस दिन नागों की पूजा होती हैं मान्यता हैं कि अगर गोगा देव की पूजा की जाए तो सांपों से रक्षा होती हैं श्रावणी पूर्णिमा से गोगा देव की पूजा आरंभ की जाती हैं यह पूजा पूरे नौ दिनों तक चलती हैं जब नवमी तिथि आती हैं तो गोगा नवमी मनाई जाती हैं और गोगा देव का पूजन होता हैं। गोगा देव महाराज से संबंधित एक किंवदंती के मुताबिक इनका जन्म योगी गोरक्षनाथ के आशीर्वाद से हुआ था। योगी गोरक्षनाथ नाथ संप्रदाय के थे। इन्होंने ही गोगा देव की मां बाछल को गुग्गल प्रसाद के तौर पर दिया था। यह गुग्गल अभिमंत्रित था। इसी अभिमंत्रित गुग्गल से महारानी बाछल से गोगा देव का जन्म हुआ था। वही इस शुभ अवसर पर गोगा देव के भक्त घरों में ईष्ठदेव की वेदी बनाते हैं साथ ही अखंड ज्योति जागरण किया जाता हैं गोगा देव की शौर्य गाथा और जन्म कथा का पाठ करते हैं।

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