देवी का ऐसा मंदिर जहां नवरात्र में होता हैं साक्षात चमत्कार, श्रद्धालुओं की मनोकामना होती है पूरी

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जयपुर। हमारे देश में 52 शक्ति पीठ है, जिनकी काफी मान्यता है। भक्त दूर दूर से आ कर देवी के दर्शन करते हैं। आज इस लेख में हम मैहर देवी मंदिर की कुछ खास विशेषता के बारे मे बता रहें हैं। मेहर देवी मंदिर में मां सती का हार गिरा था। जिसके इसका नाम मैहर पड़ा। मैहर का अर्थ है, मां का हार। आज इस लेक में हम  मां मैहर देवी से जुड़ी प्रचलित कहानी के बारे में बता रहें हैं।

मैहर देवी का मंदिर मध्य प्रदेश के सतना जिला में मैहर मां शारदा माई के नाम से जाना जाता है। इस मंदिर की ख्याति दूर-दूर तक विख्यात है। मैहर देवी का मंदिर विंध्याचल पर्वत की शिखर पर त्रिकुटा पहाड़ी में बना है। इस मंदिर में जाने के लिए लगभग एक हजार सीढ़ियां को पार करके जाया जा सकता है। लेकिन हाल में कुछ वर्षों से शारदा प्रबंध समिति ने रोपवे की व्यवस्था कर दी है। जिससे श्रद्धालुओं को सुगमता से मां के दर्शन होते है।

ऐसा माना जाता है कि राजा दक्ष की पुत्री सती जिसमे पिता के विरुद्ध भगवान  शिव से विवाह किया। जिसके कारण राजा दक्ष अपनी पुत्री से क्रोधित थे। एक बार राजा दक्ष ने विशाल यज्ञ का आयोजन किया जिसमें ब्रह्मा, विष्णु,  इंद्र और अन्य सभी देवी-देवताओं को आमंत्रित किया, लेकिन जान-बूझकर उन्होंने भगवान शिव को नहीं बुलाया।

जिस पर माता सती बगैर आमंत्रण के पिता यक्ष में चली गई और अपने पिता से भगवान शिव को आमंत्रित न करने का कारण पूछा। इस पर राजा दक्ष ने शिव के बारे में अपशब्द बोल, जिससे माता सती का हृदय दुखी हुआ और उन्होने दक्ष के यक्ष की हवन कुंड में कूद कर अपने शरीर को जला लिया। जब शिवजी को इस बारे में पता चला तो वे माता सती के पार्थिव शरीर को कंधे पर उठा कर गुस्से में तांडव करने लगे। तब भगवान विष्णु ने सती के शरीर को 52 हिस्सों में विभाजित कर दिया। ये 52 हिस्से जहां गिरे वहां वहां पर शक्तिपीठ बनें।

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