इस रूप में धरती पर हैं भगवान्, फीस कर देगी हैरान

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दोस्तों, आज यदि धरती पर भगवान है तो वो डॉक्टर के रूप में हैं क्योंकि डॉक्टर किसी भगवान से कम नहीं हैं वो भी एक मरते हुए इंसान को बचा लेते हैं । अक्सर डॉक्टर्स इंसान को जिन्दगी देने का प्रयास करते दिखते है. लेकिन कुछ अपनी जेब भरने के चक्कर में इस सेवा को खराब करते हुए किसी भी हद तक गिरते चले जाते है । आज हम आपको मिलवायेगे ऐसे Doctor से जो आज के समय में भी धरती पर भगवान् के रूप में मौजूद है ।

63 साल के थीरुवेग्दम विराराघवन Chennai के रहने वाले है जो 1973 से अपने मरीजो की देखभाल कर रहे है. थीरू न सिर्फ अपनी कम फीस बल्कि अपनी क़ाबलियत के लिए हमेशा से ही सुर्खियों में बने रहे है । आपको जानकर आश्चर्य होगा कि, थीरू की फीस मात्र 2 रूपये है ।

थीरू के पास आने वाले मरीज अपने प्रेमभाव से खाने पीने का समान भी लेकर आते है जिसे थीरू दिल से स्वीकार करते है । इतनी उम्र और तजुर्बेकार होने के बावजूद भी थीरू पैसे की बजाय समाज की सेवा करना चाहते है ।

 

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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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