पर्यटक की मौत से गोवा सरकार के दावों की पोल खुली : कांग्रेस

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गोवा के कैंडोलिम बीच पर आकाशीय बिजली की चपेट में आने से एक पर्यटक की मौत हो जाने और उसकी गर्भवती पत्नी के घायल होने की घटना के अगले दिन शनिवार को कांग्रेस ने बीच पर घूमने वाले पर्यटकों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठाए। कैंडोलिम बीच पर दिल्ली के चैतन्य नागपाल की मौत हो गई। उनकी घायल पत्नी को एक स्थानीय अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

राज्य कांग्रेस इकाई के अध्यक्ष गिरीश चोडनकर ने पिछले पांच साल के दौरान तट पर सुरक्षा और जीवनरक्षक सेवाओं पर 141.50 करोड़ रुपये खर्चे जाने पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि कैंडोलिम बीच पर जब यह दुर्घटना घटी, उस समय वहां कोई बचाव वाहन या अन्य सुविधा उपलब्ध नहीं थी।

चोडनकर ने कहा, “कैंडोलिम बीच पर एक आकाशीय बिजली गिरने से एक पर्यटक की मौत और उसकी पत्नी के जख्मी होने की घटना ने गोवा पर्यटन विभाग की बहुप्रचारित बीच सुरक्षा और जीवनरक्षक सेवाओं पर सवाल उठाए हैं, जिनपर पिछले पांच सालों में 141.50 करोड़ रुपये खर्चे गए हैं।”

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस

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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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