कोविड-19 के कारण गोवा नेशनल गेम्स की मेजबानी नहीं करना चाहता : मुख्यमंत्री

0

गोवा कोविड-19 के कारण इस साल नेशनल गेम्स की मेजबानी नहीं करना चाहता। राज्य के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने गुरुवार को इस बात की जानकारी दी। सावंत ने कहा कि 20 अक्टूबर से शुरू होने वाले खेल अनिश्चितकाल तक के लिए टाल दिया जाना चाहिए और राज्य सरकार यह बात केंद्रीय खेल मंत्रालय को बता देगी कि वह भारतीय ओलम्पिक संघ (आईओए) को सूचित कर दे कि गोवा नेशनल गेम्स के आयोजन के प्रति अनिच्छुक है।

सावंत ने कहा, “हम खेलों की मेजबानी करने के लिए 100 फीसदी तैयार हैं। हमें इन खेलों की मेजबानी कर गर्व होता लेकिन कोविड-19 के कारण हमें इसे टालना पड़ रहा है। गोवा हालांकि ग्रीन जोन है, लेकिन पूरे देश से लोग इन खेलों में हिस्सा लेना आएंगे।”

मुख्यमंत्री से जब पूछा गया कि क्या राज्य सरकार नई तारीखों पर विचार करेगी तो उन्होंने कहा, “कोविड-19 के कारण जो स्थिति है उसे देखते हुए हम नई तारीखों पर फैसला नहीं ले सकते।”

यह खेल लंबे समय से स्थगित होते आ रहे हैं जिसका एक कारण गोवा में जरूरी इंफ्रस्ट्रक्चर का पूरा न होना रहा है। यह खेल नवंबर 2016 में होने थे लेकिन अक्टूबर-2020 तक खींच दिए गए।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस

SHARE
Previous articleमलेशिया के पूर्व प्रधानमंत्री अपनी ही पार्टी से हुए बर्खास्त
Next articleराजस्थान से ओडिशा तक टिड्डी का टेरर, दक्षिण भारत अछूता
बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here