महाभारत: श्रीकृष्ण ने महाभारत के दौरान अर्जुन को दिया था ये उपदेश

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महाभारत के युद्ध के बारे में ऐसा कौन हैं, जो नहीं जानता हैं महाभारत के युद्ध में भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को गीता का उपदेश दिया, जिसके बाद धनुर्धर अर्जुन ने महाभारत के युद्ध में लड़ना शुरू किया। भगवान श्रीकृष्ण को भविष्य में होने वाले बुरी चीजों के बारे में पहले से ही पता था, जिसके द्वारा उन्होंने अर्जुन को माध्यम बनाकर सभी मानव जाति के कल्याण के लिए उपदेश दिया था। वही गीता के इन उपदेशों के द्वारा कोई भी मनुष्य अपने जीवन की सारी मुश्किलों को दूर कर सकता हैं।

कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन।
मा कर्मफलहेतुर्भुर्मा ते संगोऽस्त्वकर्मणि ॥

वही इस उपदेश का मतलब यह हैं कि भविष्य की चिंता किए बिना जो आप काम कर रहे हैं उसे पूरी दृढ़ता से करते रहना चाहिए। वही अगर हम मौजूदा वक्त पूरी मेहनत और लगन के साथ काम करेंगे तो आपका भविष्य जरूर बेहतर होगा। यो न हृष्यति न द्वेष्टि न शोचति न काङ्क्षति ।
शुभाशुभपरित्यागी भक्तिमान्यः स मे प्रियः ॥

वही कोई भी खास काम के सफल होने पर ज्यादा उत्साहित नहीं होना चाहिए। ऐसा करने से गलती के होने की आशंका बढ़ जाती हैं वही साथ ही हमें किसी दूसरे से जलन की भावना भी नहीं रखनी चाहिए।

न हि कश्चित्क्षणमपि जातु तिष्ठत्यकर्मकृत् ।
कार्यते ह्यवशः कर्म सर्वः प्रकृतिजैर्गुणैः ॥

वही इस पंक्ति का यह भी मतलब हैं कि हर व्यक्ति के लिए कोई ना कोई काम जरूर हैं, जो कि वह करने के लिए बाध्य हैं हर व्यक्ति में कोई ना कोई खूबी जरूर होती हैं बस जरूरत होती हैं अपने अंदर छिपे हुए हुनर को पहचानने की। जिसके हिसाब से वह मनुष्य काम कर सके।

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