सीबीएसई 12वीं के परिणामों में लड़कियों ने लड़कों को पछाड़ा

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केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने गुरुवार को इंटरमीडिएट परीक्षा परिणामों की घोषणा की। हंसिका शुक्ला और करिश्मा अरोड़ा को संयुक्त रूप से 12वीं कक्षा का टॉपर घोषित किया। कुल पास प्रतिशत 83.4 फीसद रहा।

दिल्ली पब्लिक स्कूल, गाजियाबाद की हंसिका शुक्ला और एस. डी पब्लिक स्कूल, मुजफ्फरनगर की करिश्मा अरोड़ा ने लड़कों को नौ प्रतिशत से पछाड़ा।

दोनों लड़कियों ने 500 में से 499 अंक प्राप्त किए हैं।

पहले स्थान पर त्रिवेंद्रम क्षेत्र रहा जहां पास प्रतिशत सबसे अधिक 98.2 फीसद रहा। वहीं चेन्नई रीजन ने 92.93 फीसद के साथ दूसरा स्थान हासिल किया, जबकि दिल्ली 91.87 फीसद पास प्रतिशत के साथ तीसरे स्थान पर रहा।

लड़कों का पास प्रतिशत 79.40 रहा, जबकि लड़कियों के लिए यह 88.7 और ट्रांसजेंडर वर्ग के लिए यह 83.33 रहा।

विशेष आवश्यकता वाले बच्चों का उत्तीर्ण प्रतिशत 90.25 प्रतिशत रहा।

2018 में पास प्रतिशत 83.01 था जबकि 2019 में यह 83.4 प्रतिशत रहा, इसमें 0.39 प्रतिशत की वृद्धि हुई।

देश भर से कुल 12,05,484 छात्रों ने परीक्षा दी और जिनमें से 10,05,427 छात्र सफल घोषित किए गए।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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