दिल्ली में प्रताड़ित की गई लड़की की रांची में मौत

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दिल्ली में प्रताड़ित की गई आदिवासी समुदाय की एक नाबालिग लड़की की बुधवार को यहां एक अस्पताल में मौत हो गई। दिल्ली में उसे नौकरी देने वाला व्यक्ति उसका बुरी तरह उत्पीड़न करता था। घरेलू काम करने वाली लड़की नई दिल्ली में बचाई गईं 16 लड़कियों में से एक थी, जिसे 25 सितंबर को रांची लाया गया था।

मूल रूप से झारखंड के गोड्डा जिले की निवासी इस लड़की की जीभ पर एक पिन लगा दिया गया था, जिससे वह अपने ऊपर हो रहे उत्पीड़न की शिकायत न कर सके।

झारखंड राज्य बाल अधिकार रक्षक आयोग की अध्यक्ष आरती कुजुर ने कहा, “लड़की को राजेंद्र इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस में भर्ती कराया गया था।”

डॉक्टरों के अनुसार, वह तपेदिक से भी ग्रसित थी।

मानव तस्करी गिरोह चलाने वाली प्रभा मिंज मुनि को पिछले महीने दिल्ली पुलिस ने गिरफ्तार किया था और झारखंड पुलिस को सुपुर्द किया था। बचाई गईं 16 लड़कियों ने दुष्कर्म और शारीरिक हिंसा की भयावह दास्तान सुनाई थी।

जांच के दौरान, यह भी खुलासा हुआ था कि प्रभा एक गैर सरकारी संगठन (एनजीओ) भी चलाती थी, जिसकी आड़ में वह लड़कियों को नौकरी का झांसा देकर बाहर बेच देती थी।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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