स्पेन के इस रेस्टोरेंट में भूत प्रेत परोसते है खाना

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अकसर लोग कभी कभार खाना खाने के लिए बाहर होटल में खाना खाने के लिए जाते हैं मगर क्या हो जब आप किसी रेस्टोरेंट में खाना खाने के लिए जाएं ओर वहां पर आपका स्वागत कोई वेटर नहीं बल्कि भूत करें तो, जी हां, आज हम आपको एक ऐसे रेस्टोरेंट के बारे में बताने जा रहे हैं जहां पर लोगों को स्वागत कोई इंसान नहीं बल्कि भूत प्रेत करते हैं । जो लोग इस रेस्टोरेंट में खाना खाने आते है वे लोग लाशों के बीच खाना खाते हैं । भूत-प्रेतों का ये रेस्टोरेंट स्पेन में है और इस रेस्टोरेंट का नाम है ला मासिया एंकांटडा । इस डरावने रेस्टोरेंट में जो लोग खाना खाने आते है उनका स्वागत खून से रंगे चाकूओं से किया जाता है।

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि, इस रेस्टोरेंट के कर्मचारी भूत-प्रेत बनकर काम करते हैं। इस तरह से लोग मनोरंजित तो होते ही है साथ ही रेस्टोरेंट में काम करने वाले कर्मचारियों को भी ग्राहकों का इस तरह मनोरंजन करना अच्छा लगता है । इस रेस्टोरेंट में 60 सीटें हैं और खाना खाने के लिए आपको पहले से ही बुकिंग करवानी होती है ।

 

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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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