German League : होफेनहेम ने रोका म्यूनिख का 23 मैचों का अजेय रथ

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आंद्रेज क्रामेरिक के दो गोल के दम पर होफेनहेम ने जर्मन फुटबाल लीग के दूसरे राउंड के मैच में मौजूदा विजेता बायर्न म्यूनिख को मात दे कर उसके 23 मैचों से चले आ रहे अजेय क्रम को रोक दिया। बायर्न ने अपने स्टार रोबर्ड लेवांडोव्स्की को बेंच पर बैठाया। वहीं होफेनहेम ने एक सप्ताह के आराम का भरपूर फायदा उठाया।

16वें मिनट में एरमनि बिकाकिक ने डेनिस गेगेर के शॉट पर गेंद को नेट के अंदर डाल होफेनहेम का खाता खोला। आठ मिनट बाद डाबुर ने अपनी टीम की बढ़त को दो गुना कर दिया।

म्यूनिख ने जोशुआ किममिच के गोल के दम पर 36वें मिनट में अपना खाता खोला और मैच में वापस आने की कोशिश की।

पहले हाफ के अंत तक होफेनेहम 2-1 से आगे थी। दूसरे हाफ में म्यूनिख के कोच हैंसी फ्लिक ने बदलाव किया और लेवांडोवस्की को मैदान पर उतारा। उनके अलावा लियोन गोरेट्ज्का को भी भेजा ताकि वह अपनी अजेय क्रम को बरकरार रख सके, लेकिन यह बदलाव काम नहीं आए क्योंकि 77वें मिनट में होफेनहेम ने एक और गोल कर स्कोर 3-1 कर दिया।

होफनेहम के लिए तीसरा गोल क्रामेरिक ने किया और इन्हीं क्रामेरिक ने अतिरिक्त समय में अपना दूसरा और टीम का चौथा गोल कर म्यूनिख के अजेय क्रम को रोक दिया।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस

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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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