गायत्री परिवार ने केरल के लिए दिए सवा करोड़ रुपये

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केरल बाढ़ प्रभावितों के लिए अखिल विश्व गायत्री परिवार के प्रमुखद्वय डॉ. प्रणव पण्ड्या एवं शैलदीदी ने सवा करोड़ रुपये जमा किए। यह राशि उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी से मिलकर प्रधानमंत्री राहत कोष के लिए दी। डॉ. पण्ड्या ने बताया, “पीड़ितों के प्रति सदैव सहानुभूति रखने वाले गायत्री परिवार केरल बाढ़ प्रभावितों के बीच मुस्तैदी के साथ खड़ा है। हमारे हजारों स्वयंसेवक केरल के विभिन्न जिलों में भोजन, मेडिकल, सामुदायिक भवनों, सफाई अभियान व कीट नाशक दवाओं का छिड़काव जैसे राहत कार्य में जुटे हैं।”

उन्होंने बताया कि गुजरात भूकंप, केदारनाथ त्रासदी कोई अन्य विपदा, सभी में गायत्री परिवार ने अपनी जिम्मेदारी का बखूबी निर्वहन किया है। संस्था की अधिष्ठात्री शैलदीदी ने कहा कि प्रधानमंत्री को भेंट की गई इस राशि से पीड़ित मानवता की सेवा में सहायता होगी।

डॉ. पण्ड्या व शैलदीदी के मार्गदर्शन में शांतिकुंज व स्थानीय गायत्री परिवार की टीम पिछले तीन सप्ताह से केरल के बाढ़ पीड़ितों की सेवा में जुटी है। आवासीय व्यवस्था, भोजन, चिकित्सा सेवा से लेकर चयनित क्षतिग्रस्त भवनों के पुननिर्माण के कार्य आदि में स्वयंसेवक जुटे हैं। गायत्री परिवार ने केरल में सात सूत्रीय कार्यक्रम को क्रियान्वित करने के लिए आपदा प्रबंधन समिति का गठन किया है। इस बारे में डॉ. पण्ड्या ने प्रधानमंत्री को अवगत कराया।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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