गणेश चतुर्थी उत्सव पर इन बातों का रखें विशेष रूप से ध्यान

गणेश महोत्सव 13 सितम्बर को से शुरु होने जा रहा है इस दिन लोग अपने घर व कामगाज वाली जगहों पर पूजा करते हैं। गणेश महोत्सव बडी धूम -धाम सेमनाय़ा जाता हैं। भगवान गणेश सभी देवताओं में सबसे पहले पूजे जाने वाले देवता हैं

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जयपुर। गणेश महोत्सव 13 सितम्बर को से शुरु होने जा रहा है इस दिन लोग अपने घर व कामगाज वाली जगहों पर पूजा करते हैं। गणेश महोत्सव बडी धूम -धाम सेमनाय़ा जाता हैं। भगवान गणेश सभी देवताओं में सबसे पहले पूजे जाने वाले देवता हैं गणपति की स्थापना से पहले कई जरूरी चीजों का हमें ध्यान रखना अतिअावश्यक है ताकि पूजा का पूरा फल मिलसके। भगवान गणेश जी स्थापना करते समय किनकिन बातों का ख्याल रखना चाहिए।

गणेश जी का स्थापना में सबसे जरूरी वास्तु का विशेष ध्यान रखना चाहिए। इनकी मूर्ति को पूर्व उत्तर दिशा में बैठना बहुत शुभ माना जाता हैकभी भूलकर भी दक्षिण पश्चिम कोण पर इनकी स्थापना नहींकरनी चाहिए, एेसा नहीं होने पर गणेश जी हमसे नाराज भी हो सकते हें,

वास्तु शास्त्र के अनुसार गणेश जी की पूजाकरते समय दो या उससे अधिक मूर्तियों को एक साथ नहीं रखना चाहिए,इसे अशुभ माना जाता है क्योंकि दो मूर्तियों की ऊर्जा आपस में एक साथ टकराने सेअशुभ फल मिलता है। जो कि हिदूं परम्परा के विरोध में माना जाता हैं।

हमें विशेष रूप से एक बात का ध्यान रखना बहुत जरूरी होता हैं कि भगवान गणेश जी की मूर्ति का मुख दरवाजे की तरफ नहीं होना चाहिएक्योंकि गणेश जी मुख की तरफ समृद्धि, सुख और सौभाग्यविधमान हैजबकि गणेश जी के पीठ वाले हिस्से पर दुख और दरिद्रता का वास होता है,

 

भगवान गणेश जी की मूर्ति को घर पर लाते समय हमें एक बात का विशेष रूप से ध्यान रखना चाहिए कि गणेश जी की सूंड बांयी तरफ होना चाहिए,जो कि शुभ माना जाता और ऐसी मान्यता भी मानीजाताी है कि इस तरह की मूर्ति की उपासना करने पर मनुष्य की सारी इच्छा व मनोकामना गणेश जी जल्द पूरी करते है।पुराणों व कथाओं के अनुसार, गणेश जी की पीठ के दर्शन करना अशुभ माना होता है। क्य़ो्कि एेसा माना जाता हैं कि गणेश जी की पीठ पर दरिद्रता का निवास होता है,और एेसी भी मान्यता मानी जाती हैकि इसके दर्शन करने से व्यक्ति का दुर्भाग्य हाेता है।

 

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