धर्म को बांटकर गांधी की दुबारा हत्या नहीं होने देंगे : यशवंत सिन्हा

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नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के विरोध में महाराष्ट्र (मुंबई के गेटवे ऑफ इंडिया) से नौ जनवरी को चली ‘गांधी शांति यात्रा’ आगरा से रविवार को सैफई (इटावा) पहुंची। पूर्व केंद्रीय मंत्री यशवंत सिन्हा के नेतृत्व में यात्रा के सैफई पहुंचने पर यहां गणतंत्र दिवस समारोह धूमधाम से मनाया गया। इस समारोह की उल्लेखनीय बात यह रही कि 155 फुट ऊंचे खंबे पर लगे तिंरगे को फहराया गया।

इस अवसर पर समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष व उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव और पार्टी के राष्ट्रीय प्रमुख महासचिव प्रो. रामगोपाल यादव भी उपस्थित थे। सीएए के विरोध में निकाली गई गांधी शांति यात्रा को लेकर यहां पहुंचे भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के पूर्व कद्दावर नेता व पूर्व केंद्रीय वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा का स्वागत यहां शाल भेंट कर हुआ। रविवार को समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता और उत्तर प्रदेश में गांधी शांति यात्रा की अगुवाई कर रहे आई.पी. सिंह ने टेलीफोन पर यह जानकारी आईएएनएस को दी।

सिंह ने कहा, “गांधी शांति यात्रा के सैफई पहुंचने और 71वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर आयोजित झंडारोहण समारोह में सपा के राष्ट्रीय सचिव राजेंद्र चौधरी, पूर्व सांसद धर्मेद्र यादव, तेज प्रताप यादव, विधायक डॉ. दिलीप यादव, राज कुमार राजू सहित अनुराग यादव व अंशुल यादव आदि भी मौजूद थे।”

इस अवसर पर भारी भीड़ को संबोधित करते हुए कभी भाजपा के ‘थिंक-टैंक’ रहे यशवंत सिन्हा ने कहा, “गांधी शांति यात्रा के रुप में हम शांति का संदेश लेकर निकले हैं। किसी भी कीमत पर हम केंद्र में बैठे चंद स्वार्थी नेताओं की कारगुजारियों के चलते धर्म को बांटकर अब और किसी गांधी का कत्ल नहीं होने देंगे।”

उन्होंने कहा, “वैसे भी गांधी के विचारों और देश के संविधान से खिलवाड़ करने वाले खुद-ब-खुद अपने खोदे हुए गड्ढों में गिरने के कगार पर बैठे हैं। बस हमें-आपको आंख और कान खुले रखकर ऐसे लोगों की निगरानी ईमानदारी से करनी है।”

इस अवसर पर गांधी शांति यात्रा में शामिल होकर पहुंचे लोगों को संबोधित करते हुए अखिलेश यादव ने कहा, “महात्मा गांधी गुजरात से धोती पहनकर हाथ में एक अदद लाठी लेकर निकले थे ताकि वे दुनिया को सत्य और अहिंसा का रास्ता दिखा सकें। इसे बदनसीबी ही कहेंगे कि आज उसी गुजरात के चंद नेता सत्य और अहिंसा की राह में रोड़ा बन रहे हैं।”

अखिलेश यादव ने कहा, “आज देश का किसान दुखी है। नई पीढ़ी का भविष्य अंधकार में है। विकास अवरुद्ध है। अर्थव्यवस्था चौपट हो चुकी है। अब सोचिए कि बर्बादी के लिए भला और बाकी कहां तथा क्या बचा है? आज संविधान बचाने की लड़ाई लड़ी जा रही है। वो संविधान जिस के कंधों पर हमारी संपूर्ण लोकतांत्रिक व्यवस्था टिकी हुई है। इससे भी बड़ा और क्या खतरा भला किसी राष्ट्र को हो सकता है? हमें और आपको जरूरत है तो एक ईमानदार कोशिश करने की। ताकि कम के कम गांधी-लोहिया, अंबेडकर के बनाए रास्तों को बचा सकें। अगर यह रास्ते ही नहीं बचेंगे तो आने वाली पीढ़ियों का भविष्य भी भला कैसे सुरक्षित रह सकेगा।”

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता आई.पी. सिंह के मुताबिक, “सीएए के विरोध में शुरू की गई देशव्यापी गांधी शांति यात्रा के लिए पूर्व केंद्रीय वित्त मंत्री रविवार को ही लखनऊ पहुंच गए। सोमवार को समाजवादी पार्टी मुख्यालय पर यहां एक बड़ी प्रार्थना सभा का आयोजन होगा। उसके बाद गांधी शांति यात्रा को लेकर आगे की रणनीति बनाई जाएगी। इस प्रार्थना सभा में बड़ी संख्या में समाजवादी पार्टी कार्यकर्ता जुटेंगे।”

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस

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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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