असिस्टेंट प्रोफेसर बनने और प्रमोशन के लिए 2021 से पीएचडी अनिवार्य

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जयपुर । यूनिवर्सिटी में सीधे असिस्टेंट प्रोफेसर बनने के लिए अब पीएचडी जरूरी होगी। एचआरडी मिनिस्टर प्रकाश जावडेकर ने बताया कि 2021 से ये व्यवस्था लागू होगी। हालांकि कॉलेज में असिस्टेंट प्रफेसर बनने के लिए मास्टर डिग्री के साथ नेट या पीएचडी का नियम बरकरार रहेगा।

यूनिवर्सिटी में असिस्टेंट प्रफेसर बनने के लिए पीएचडी अनिवार्य कर दिया है। इस संबंध में एचआरडी मिनिस्टर प्रकाश जावडेकर ने कहा कि 2021 से इस व्यवस्था को लागू कर दिया जाएगा। केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा है कि वर्ष 2021-22 से विश्वविद्यालयों में शिक्षकों की नियुक्ति के लिये पीएचडी अनिवार्य होगा और राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा (नेट) को एकमात्र पात्रता के रूप में स्वीकार नहीं किया जायेगा। हालांकि, कॉलेजों में सीधे नियुक्ति के लिये न्यूनतम पात्रता के रूप में स्नातकोत्तर डिग्री के साथ नेट या पीएचडी जारी रहेगा।

साथ ही जावडेकर ने कहा कि पहले के नियम में जो इन्सेंटिव हैं उन्हें बरकरार रखा गया है। लेकिन एपीआई को खत्म किया है। उन्होंने कहा कि अब कॉलेज टीचर के लिए शोध करना जरूरी नहीं होगा। उन्होंने कहा कि विदेशी यूनिवर्सिटी से पीएचडी डिग्री हासिल किए व्यक्ति को अब देश में नेट एग्जाम से छूट मिलेगी, बशर्ते उसे एआईयू ने बराबर माना हो।

एचआरडी मिनिस्टर ने कहा कि अब कॉलेज शिक्षकों के लिये अनिवार्य रूप से शोध करना जरूरी नहीं होगा। पदोन्न्ति में शिक्षकों के पढ़ाने से जुड़े परिणामों को ध्यान में रखा जायेगा। अगर शिक्षक शोध करते है, तब पदोन्नति में अतिरिक्त अंक जुड़ेंगे।

जावड़ेकर ने कहा कि विश्वविद्ययालयों में नयी नियुक्ति केवल पीएचडी धारकों की होगी। इसके लिये तीन वर्षों का समय दिया गया है। साल 2021 से असिस्टेंट प्रोफेसर को पीएचडी धारक होना होगा।

 

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