फ्रेंच लीग : पाएट के दो गोलों की बदौलत जीता मार्सिले

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फ्रेंच लीग के पहले मैच में कप्तान दिमित्री पाएट के दो गोलों की बदौलत ओलम्पिक मार्सिले ने सीजन के पहले मैच में टूलोसे को 4-0 से करारी शिकस्त दी। पाएट ने पहला हाफ खत्म होने से कुछ क्षण पहले (45वें मिनट) वीएआर की बदौलत मिली पेनाल्टी को गोल में बदलकर अपनी टीम को 1-0 से आगे कर दिया। फ्रेंच लीग के किसी मैच में पहली बार वीएआर का उपयोग किया गया।

दूसरे हाफ में भी मार्सिले का दबदबा देखने को मिला और 62वें मिनट में पाएट ने मैच का अपना दूसरा गोल किया। मैच के अंतिम क्षणों में भी मेजबान टीम ने अपने आक्रमण को जारी रखा। 89वें मिनट में वालेरे जर्मेन ने शानदार गोल करते हुए मार्सिले को 3-0 से आगे कर दिया। मार्सिले के लिए चौथा और अंतिम गोल फ्लोरिन थाउविन ने 92वें मिनट में किया।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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