पूर्व विधायक रूचि वीरा बसपा से निष्कासित

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पूर्व विधायक व आंवला सीट से बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के टिकट पर लोकसभा का चुनाव लड़ चुकीं रूचि वीरा को बसपा ने अनुशासनहीनता व पार्टी विरोधी गतिविधियों के कारण निष्कासित कर दिया है। बसपा जिलाध्यक्ष राजेंद्र कुमार ने शनिवार को बताया कि अनुशासनहीनता व पार्टी विरोधी गतिविधियों में लिप्त होने की छानबीन कराने के बाद ही उनके खिलाफ यह कार्रवाई हुई है।

सूत्रों के अनुसार, रूचि बिजनौर में पिछले दिनों हुए वैश्य सम्मेलन में शामिल हुई थीं। इस सम्मेलन में जिले के प्रभारी मंत्री कपिल देव अग्रवाल समेत कई नेता मौजूद थे। चूंकि सम्मेलन में भाजपा नेता की मौजूदगी थी, इसलिए यह बात बसपा हाईकमान को नागवार गुजरी।

गौरतलब है कि रूचि वीरा 2014 के उपचुनाव में सपा के टिकट पर पहली बार विधायक बनी थीं लेकिन लोकसभा चुनाव से पहले उन्होंने बसपा का दामन थाम लिया। बसपा ने बिजनौर लोकसभा सीट से उन्हें टिकट दिया था। बाद में उनका टिकट काटकर उनकी जगह सांसद मलूक नागर को टिकट थमा दिया गया। इसके बाद रूचि वीरा को आंवला लोकसभा सीट से टिकट दे दिया गया। आंवला से रूचि वीरा चुनाव हार गई। रूचि बसपा में ही राजनीति का अपना नया घर तलाश रही थीं। उनको आजम खान का नजदीकी भी माना जाता है।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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