ऑपरेशन के बाद स्वस्थ्य हो रहे हैं पूर्व भारतीय captain Bedi

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भारतीट क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान बिशन सिंह बेदी का कुछ दिन पहले ही ऑपरेशन हुआ था और अब स्वस्थ्य हो रहे हैं। 74 साल की बेदी कुछ समय से ठीक नहीं थे। पहले वह फिसल गए थे और फिर उसके बाद उन्हें अन्य बीमारियों का सामना करना पड़ा।

एक सूत्र ने बुधवार को कहा, “उनके कई ऑपरेशन हुए हैं। उनकी एक सफल हार्ट बाईपास सर्जरी भी हुई है। फिर उन्हें अपने मस्तिष्क में रक्त के थक्के को हटाने के लिए एक ऑपरेशन से गुजरना पड़ा। लेकिन वह ठीक हो रहे हैं और उन्हें आईसीयू से बाहर निकाला जा सकता है।”

उन्होंने कहा, ” लेकिन बेदी ‘पाजी’ एक बहुत ही निजी व्यक्ति हैं, और वह नहीं चाहते कि लोग उनकी बीमारियों पर चर्चा करें। उन्हें एक सप्ताह में छुट्टी दी जा सकती है।”

बाएं हाथ के पूर्व स्पिनर बेदी ने भारत की तरफ से 67 टेस्ट और 10 वनडे मैचों में क्रमश : 266 और सात विकेट लिए हैं।

न्यूज सत्रोत आईएएनएस

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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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