जी के प्रमोटर एस्सेल समूह को ऋणदाताओं की औपचारिक सहमति

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जी एंटरमेंट एंटरप्राइजेज लि. (जीईईएल) के प्रमोटर एस्सेल समूह ने अपने ऋणदाताओं की औपचारिक सहमति हासिल कर ली है, जिनके पास एस्सेल के शेयर गिरवी रखे हुए हैं। कंपनी ने सोमवार को यह घोषणा की। सुभाष चंद्रा की अगुवाई वाले एस्सेल समूह ने रविवार देर रात घोषणा की कि ऋणदाताओं के साथ हुई बैठक में औपचारिक सहमति प्राप्त हो गई, जिस पर पिछले हफ्ते सहमति बनी थी और इसे अंतिम रूप दे दिया गया है।

बयान में कहा गया है, “सहमति के मुताबिक, ऋणदाता इस पर सहमत हुए हैं कि वे 30 सितंबर, 2019 के पहले कंपनी को डिफॉल्ट घोषित नहीं करेंगे, ताकि एस्सेल समूह के सूचीबद्ध कॉर्पोरेट संस्थाओं के शेयरों पर इसका असर न पड़े।”

बयान में कहा गया है, “इस सहमति से समूह के प्रबंधन को मूल्य से समझौता किए बिना कंपनी की मुख्य परिसंपत्ति की रणनीतिक बिक्री करने के लिए पर्याप्त समय मिलेगा।”

बयान में आगे कहा गया है, “बैठक के दौरान एस्सेल समूह के प्रबंधन ने एक बार ऋणदाता कंपनियों को आश्वस्त किया कि उल्लिखित समय सीमा के अंदर हिस्सेदारी की बिक्री प्रक्रिया का लाभ उठाते हुए एक पूर्ण समाधान प्राप्त कर लिया जाएगा।”

ऋणदाताओं के पास जीईईएल और डिश टीवी इंडिया के प्रमोटरों के शेयर गिरवी रखे गए हैं।

इस बारे में एस्सेल समूह के अध्यक्ष सुभाष चंद्रा ने कहा, “हमारे लिए, जहां पिछले हफ्ते दिया गया उनका आश्वासन ही पर्याप्त से अधिक था, औपचारिक सहमति हम पर उनके भरोसे और हमारी परिसंपत्तियों के वास्तविक मूल्य को सही ठहराती है।”

जीईईएल के शेयरों में चंद्रा के इस बयान के बाद सर्किट ब्रेकर लगाना पड़ा था, जिसमें उन्होंने कहा था कि कंपनी प्रबंधन ने ऋणदाताओं की सफलतापूर्वक सहमति प्राप्त कर ली है।

पिछले हफ्ते एक मीडिया रिपोर्ट में बताया गया था कि जी के प्रमोटर एस्सेल समूह साल 2016 के नवंबर में की गई नोटबंदी के बाद धनशोधन में शामिल रहा था। इसके बाद कंपनी की मनोरंजन इकाई के शेयरों में 30 फीसदी से अधिक की गिरावट दर्ज की गई थी और उसका बाजार पूंजीकरण 14,000 करोड़ रुपये कम हो गया था।

जीईईएल ने हालांकि स्पष्टीकरण जारी किया कि मीडिया रिपोर्ट में लगाए गए आरोप बेबुनियाद हैं और उसका इन लेन-देन से कोई लेना-देना नहीं है।

शुक्रवार को लिखे एक ‘खुले खत’ में चंद्रा ने बैंकरों, एनबीएफसीज और म्यूचुअल फंड्स से “उनकी उम्मीदों पर खरा नहीं उतरने को लेकर माफी मांगी” और कई अवसंरचना परियोजनाओं की असफलता को भारी कर्ज का जिम्मेदार ठहराया और कहा कि उनका इरादा जीईईएल में अपनी प्रमोटर हिस्सेदारी को बेचकर कर्ज की एक-एक पाई चुकाने का है।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस

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