पूर्व सीएम फारूक ने कहा, कश्मीर में हालात से निपटने पाकिस्तान से वार्ता जरूरी

0
219

पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला ने बुधवार को कहा कि जम्मू एवं कश्मीर में हालत से निपटने का एकमात्र तरीका पाकिस्तान के साथ बातचीत करना है। नेशनल कांफ्रेंस के नेता ने मीडिया से कहा, “जम्मू एवं कश्मीर में मौजूदा तूफान से निकलने का एकमात्र तरीका पाकिस्तान से वार्ता है।”

अब्दुल्ला ने कहा कि कश्मीर में हालात बहुत ही भयावह हैं और युवाओं में अत्यधिक नाराजगी है।

उन्होंने चेतावनी दी, “यदि हालात ऐसे ही बने रहे तो कश्मीर के हर हिस्से से लोग आगे आकर अपने जीवन का बलिदान देंगे।”

उन्होंने कहा कि राज्य को संवैधानिक स्वायत्तता की गारंटी है, जिसे बहाल करने की जरूरत है, ताकि लोगों को एहसास हो कि उनका सम्मान बहाल हो गया है। उन्होंने कहा,”चालें चलने से मदद नहीं मिलेगी।”

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


SHARE
Previous articleहमेशा फायदेमंद कही जाने वाली तुलसी से होते हैं कुछ नुकसान भी, जानिए यह अनोखा खुलासा
Next articleअब एयरटेल देगा हर महीने 50 जीबी डेटा, जानिये पूरी खबर
बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here