पूर्व वायुसैनिक ने स्कूल को दान किए 17 लाख रुपये

0
162

अपनी दिवंगत पत्नी को श्रद्धांजलि देते हुए वायुसेना के एक सेवानिवृत्त अधिकारी ने उस स्कूल को 17 लाख रुपये दान कर दिए, जहां उनकी पत्नी पढ़ाने जाती थी। सेवानिवृत्त विंग कमांडर जे.पी. बदूनी ने सुब्रतो पार्क स्थित एयर फोर्स गोल्डन जुबली इंस्टीट्यूट की प्रधानाचार्या को बैंक चेक दिए। उन्होंने उम्मीद जताई कि इससे योग्य छात्रों को बेहतर बनने में मदद मिलेगी।

बदूनी की पत्नी विधु बदूनी यहां 1986 से प्राइमरी शिक्षक के तौर पर काम करती थीं। इस वर्ष छह फरवरी को हृदयाघात से उनका निधन हो गया था।

स्कूल की प्रधानाचार्या पूनम एस. रामपाल ने कहा कि दान में से 10 लाख रुपये का उपयोग प्रतिवर्ष कक्षा 5-11 तक के मेधावी छात्रों को पुरस्कार और छात्रवृत्ति देने के लिए किया जाएगा।

शेष राषि का उपयोग स्कूल की प्राइमरी विभाग की आधारभूत संरचना के विकास में किया जाएगा।

यह राशि उनकी पत्नी द्वारा स्कूल में कई वर्षो तक नौकरी करते हुए बचाए गए रुपये ही हैं।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


SHARE
Previous articleराहुल गांधी ने कहा, कांग्रेस झूठे वादे नहीं करेगी
Next articleप्रभाव निवेश’ बुनियादी जरूरतें पूरी करने में मददगार : रतन टाटा
बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here