देश का विदेशी पूंजी भंडार 3.60 अरब डॉलर बढ़ा

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जयपुरः  देश केविदेशी पूंजी भंडार में पिछले सप्ताह 3.60 अरब डॉलर का इजाफा हुआ। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के आंकड़ों के अनुसार, 15 मार्च को समाप्त सप्ताह में भारत का विदेशी पूंजी भंडार 405.63 अरब डॉलर दर्ज किया गया, जबकि उससे पिछले सप्ताह आठ मार्च को विदेशी पूंजी भंडार 402.03 अरब डॉलर था। विदेशी पूंजी भंडार में विदेशी मुद्रा परिसंपत्ति (एफसीए), स्वर्ण भंडार, विशेष आहरण अधिकार (एसडीआर) और अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) में भारत की आरक्षित निधि शामिल होती हैं।

विदेशी पूंजी भंडार से संबंधित आरबीआई के नवीनतम साप्ताहिक आंकड़े शुक्रवार को जारी किए गए। इन आंकड़ों के अनुसार, एफसीए पिछले सप्ताह 3.54 अरब डॉलर बढ़कर 377.77 अरब डॉलर हो गया। वहीं, स्वर्ण भंडार 3.89 करोड़ डॉलर बढ़कर 23.40 अरब डॉलर हो गया। एसडीआर के मूल्य में 59 लाख डॉलर का इजाफा हुआ, जिसके बाद इसका मूल्य 1.46 अरब डॉलर हो गया। आईएमएफ के पास आरक्षित निधि 1.21 करोड़ डॉलर बढ़कर 2.99 अरब डॉलर हो गई।

न्यूज़ सोर्स आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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