दाह संस्कार कर लौटते वक्त इस वजह से पीछे मुड़कर नहीं देखना चाहिए!

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हमारें वेदों और पुराणों में इस बात को बताया गया है कि हमें दाह संस्कार से आने के बाद पिछे मुडकर नहीं देखना चाहिए । मगर क्या आपने कभी ये सोचा है कि आखिर ऐसा क्यों कहा गया हैं । तो चलिए आज हम आपको इसके बारे में बता दें । शवदाह कर घर लौटते वक्त पीछे मुड़कर देखने पर आत्मा का अपने परिवार के प्रति मोह टूट नहीं पाता है । इसके साथ ही आत्मा को इस बात का संदेश भी पहुंचता है कि उसके प्रति अभी भी आपका मोह बरकरार है और इस कारण से आपको पिछे मूडकर नहीं देखना चाहिए । जब शव को जलाया जाता है तब इसके माध्यम से आत्मा को यह समझाया जाता है कि अब उसका इस संसार से कोई लेना-देना नहीं है । इस संसार में उसका हिसाब पूरा हो चुका हैं । उसकी अब एक अलग दुनिया है जहां उसे लौट जाना चाहिए ।

संसार की मोह—माया को त्याग करना आसान नहीं होता, इससे आत्मा को मुक्ति मिलने में कठिनाई होती है, उस पर अगर परिवार का सदस्य या कोई प्रियजन शवदाह कर लौटते वक्त पीछे मुड़कर देखता है तो आत्मा का लगाव उससे कम होने के बजाय और बढ़ जाता है और वो परलोक नहीं जा पाती हैं । इसके साथ् ही आपको बता दें कि, कभी-कभी वह जीवित व्यक्ति के शरीर में प्रवेश कर उसे सताने लगती है। बच्चे या गर्भवती महिलाएं आत्माओं के प्रभाव में जल्दी आ जाते हैं इसलिए भी श्मशान से इन्हें दूरी बनाए रखना चाहिए ।

 

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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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