27 सालों में पहली बार बिना ऑडिशन के मिला रोल : सूरज थापर

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टेलीविजन धारावाहिक ‘इशारों इशारों में’ के किरदारों की सूची में शामिल हुए टेलीविजन अभिनेता सूरज थापर का कहना है कि 27 सालों के उनके शो बिजनेस करियर में यह पहली भूमिका है जो उन्हें किसी ऑडिशन या मॉक टेस्ट दिए बिना मिली है। सूरज ने कहा, “27 सालों के बाद किसी ऑडिशन या मॉक टेस्ट या लुक टेस्ट के बिना मुझे एक शो मिला। इस कार्यक्रम के निर्माता मुझे कुछ समय से जानते हैं और वह मुझे इस किरदार में लेना चाहते थे।”

सूरज ‘ससुराल गेंदा फूल’, ‘एक नई पहचान’ और ‘ छल-शह और मात’ जैसे धारावाहिकों में अपने बेहतर अभिनय के लिए मशहूर हैं।

‘इशारों इशारों में’ में सूरज मुख्य अभिनेत्री सिमरन परींजा के पिता के किरदार में नजर आएंगे।

अपने किरदार के बारे में उन्होंने कहा, “मैं एक अमीर उद्योगपति का किरदार निभा रहा हूं जो अपनी बेटी के लिए परफेक्ट जीवनसाथी की ख्वाहिश रखता है और बेटी के प्रति उसका प्यार और ख्याल ही बाद में जुनून में बदल जाता है।”

सूरज ने यह भी कहा कि पहले उन्होंने जितने भी किरदार किए हैं यह उन सबसे अलग है और उन्हें इसे निभाने का इंतजार है।

इस कार्यक्रम का प्रसारण सोनी एंटरटेनमेंट टेलीविजन पर 15 जुलाई से होगा।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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