पहली बार आईआईटी में सभी सीटें भरीं

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मानव संसाधन विकास (एचआरडी) मंत्रालय ने कहा है कि देश में मौजूद 23 भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों (आईआईटी) की सभी सीटें पहली बार भर गई हैं। एचआरडी सचिव आर. सुब्रह्मण्यम ने कहा कि सभी आईआईटी में अंडरग्रेजुएट पाठ्यक्रमों की सभी 13,604 सीटें सभी आईआईटी के सक्रिय सहयोग और आईआईटी रुढ़की के समन्वयन से भर गई हैं।

एचआरडी सचिव ने ट्वीट किया, “इस वर्ष आईआईटी में 13,604 प्रवेश और कोई सीट खाली नहीं -एमएचआरडी में हमारे लिए एक महान कदम, जिसे सभी आईआईटी के सहयोग और आईआईटी रुढ़की के समन्वयन से हासिल किया गया।”

अधिकारियों ने कहा है कि 23 आईआईटी में सीटों पर प्रेवश एचआरडी मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़े के अनुसार अतिरिक्त हुआ है। इसका अर्थ यह है कि कमजोर वर्गो के लिए रखी गईं लगभग 620 सीटें भी भर गई हैं। यह पहला साल है जब आर्थिक रूप से कमजोर वर्गो के लिए आरक्षण लागू किया गया है।

पिछले साल आईआईटी में 118 सीटों का कोई ग्राहक नहीं था। 2017 में 110 सीटें खाली थीं, 2016 में 96 सीटें, 2015 में 32 सीटें, 2014 में तीन और 2013 में 149 सीटें खाली रह गई थीं।

अधिकारी ने कहा कि मंत्रालय ने खाली सीटों को भरने के लिए उचित उपाय सुझाने के लिए एक समिति गठित की है।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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