बच्चों के भविष्य के लिए मां-बाप ने किया 15 हजार फुट ऊंचे शिंकुला दर्रा को पार- जाने वजह

वही कुछ का मानना है कि लम्बी दौर के हिंसा ने कश्मीर में आम जीवन को मुश्किल और विकास के अवसरों को बाधित किया है।

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कहते है कि हौसले और जुनून से दुनिया की हर कठिनाई से सामना किया जा सकता है। अमूनन हर परिवार अपने बच्चो के भविष्य को लेकर संजीदा रहता है और उसकी कोशिस बच्चो को शिक्षा के जरिये बड़ा आदमी बनाने की होती है। ऐसा ही कुछ सपना कारगिल जिले के जंस्कर के कुछ बच्चे और मां-बाप ने देखा और अपने हौसले के बल पर पूरा कर दिखाया।बता दे कि कुछ परिवारों का दस्ता कारगिल जिले के जंस्कर से चल पड़ा हिमाचल प्रदेश के केलांग में नया बसेरा बसाने के कठिन मुहीम पर । यात्रा के दौरान 15 हजार फुट ऊंचे शिंकुला दर्रा को पार भी किया जहा अभी भी 20 फुट तक बर्फ जमी हुई है.18 लोगों के इस काफिले में 66 साल के एक बुजुर्ग समेत एक छह साल का बच्चा भी शामिल है.गौरतलब है कि इसके लिए उन्होंने जंस्कर से केलांग तक की 138 किलोमीटर की सफर बर्फ पर पैदल चलकर पूरा किया जिसके लिए उन्हें पांच दिन का वक्त मिला. 18 लोगों के इस दस्ते ने दुर्गम पहाड़ियों से होते हुए अपनी इस मुश्किल यात्रा को पूरा किया। दल 12 अप्रैल को जंस्कर से रवाना हुआ था. और 16 अप्रैल को ये लोग केलांग पहुंचे. . सफर के दौरान सभी मुसाफिर काली चाय के साथ सत्तू का घोल पीकर अपनी भूख मिटाते रहे। बता दे कि कश्मीर घाटी में पलायन आम बात है। आमतौर पर लोग घाटी में व्याप्त हिंसा के कारण घाटी से भाग रहे है। वही कुछ का मानना है कि लम्बी दौर के हिंसा ने कश्मीर में आम जीवन को मुश्किल और विकास के अवसरों को बाधित किया है।

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