कोरोना संकट के बीच फेस्टिव सीजन में ई-कॉमर्स कंपनियों ने ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए भारी डिस्काउंट दिए। इससे कंपनियों के साथ नए ग्राहक भी जुड़े। इसमें छोटे शहरों के ग्राहकों की संख्या अधिक है। इसमें फ्लिपकार्ट ग्रुप की कंपनियों की ग्रॉस मर्चेंडाइज वैल्यू (GMV) में सबसे ज्यादा हिस्सेदारी रही। ग्रुप की कंपनियों में मिंत्रा भी शामिल है। कोरोना संकट के बीच ऑनलाइन खरीदारी में बढ़ोतरी देखने को मिली है। इसमें ई-कॉमर्स कंपनियों के लिए टीयर-2 और टीयर-3 शहरों की भागीदारी सबसे ज्यादा अहम है।

फ्लिपकार्ट ने किया नया निवेश

कल्याण कृष्णामूर्ति बताया कि कंपनी ने हाल के दिनों में पांच नए निवेश किए हैं। इसमें आदित्य बिरला फैशन और अरविंद यूथ ब्रांड्स शामिल हैं। कंपनी ने ABFRL में 7.8% हिस्सेदारी के एवज में 1500 करोड़ रुपए का निवेश किया। इससे फ्लिपकार्ट की ग्राहकों तक पहुंच बनाने और बड़े स्तर पर प्रोडक्ट्स की रेंज उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी। क्योंकि, आदित्य बिरला फैशन फैशन ब्रांड्स और फुटवियर का भी उत्पादन करता है।

उन्होंने बताया कि भारत का ग्रॉसरी और फैशन सेगमेंट भारत की रिटेल इकोनॉमी में 80-90% की हिस्सेदारी रखती हैं। इन दोनों कैटेगरीज को ई-कॉमर्स का जबरदस्त सहारा मिला है। अनुमान के मुताबिक भारत का ई-कॉमर्स मार्केट 2024 में बढ़कर 100 अरब डॉलर का हो जाएगा। इसमें ग्रॉसरी और फैशन कैटेगरी बड़ी भूमिका निभाएंगी। इसीलिए फ्लिपकार्ट इन दोनों कैटेगरीज में निवेश कर रही है।

फ्लिपकार्ट ग्रुप की मार्केट वैल्यू जुलाई में 25 बिलियन डॉलर थी। इसमें वॉलमार्ट के 1.2 बिलियन डॉलर का निवेश भी शामिल है। इसके अलावा हाल के महीनों में कई निवेश हुए हैं। इसमें निंजाकार्ट (Ninjacart), लॉजिस्टिक कंपनी शैडो फैक्स (Shadowfax), अरविंद फैशन लिमिटेड का अरविंद यूथ ब्रांड्स और आदित्य बिरला फैशन एंड रिटेल लिमिटेड (ABFRL) शामिल हैं।

कारोबार बढ़ाने के लिए आईपीओ लाएगी कंपनी

कृष्णामूर्ति ने कहा कि भारत के इंटरनेट इकोसिस्टम में मासिक आधार पर इंटरनेट यूजर की संख्या करीब 45 करोड़ है। जबकि, ऑनलाइन खरीदारी करने वाले ग्राहकों की संख्या कुल इंटरनेट ग्राहकों की तुलना में 10% से भी कम है। ऐसे में जब कोई बड़े मार्केट वैल्यू वाली कंपनी की इंट्री होती है तो उस सेक्टर का मार्केट बढ़ता है। हालांकि, इससे प्राइस वार और ग्राहकों के लिए क्वालिटी प्रोडक्ट्स की उपलब्धता बढ़ जाती है। ऐसे में कंपनी कारोबार को बढ़ाने और स्थाई करने के लिए आईपीओ ला सकती है

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