पहला रोहिंग्या परिवार वापस पहुंचा म्यांमार, संयुक्त राष्ट्र ने जताई सुरक्षा संबंधी चिंता

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म्यांमार में आक्रामकता का शिकार बने अल्पसंख्यक रोहिंग्या समुदाय शायद ही म्यांमार की सेना को माफ कर दे। लेकिन मानवाधिकार का उल्लंघन करने वाली म्यांमार की सेना दुनिया की नजरों में एक अपराधी के तौर पर ही जानी जाएगी। लेकिन इसी बीच रोहिंग्याओं की कथित घर वापसी करवाने वाली म्यांमार की सरकार ने हालिया रिपोर्टस् में बताया है कि बांग्लादेश में से रोहिंग्या शरणार्थियों का पहला परिवार वापस म्यांमार पहुंच गया है।

Image result for First Rohingyas family returns to Myanmar, UN declared security concernsजाहिर है कि यह घटना उस समय सामने आई है, जब म्यांमार की वहशी सेना को संयुक्त राष्ट्र ने ब्लैकलिस्ट में शामिल किया है। लेकिन संयुक्त राष्ट्र संघ ने रोहिंग्या शरणार्थियों की म्यांमार वापसी को लेकर ख़तरे की आशंकाएं जताई हैं। पिछले दिनों रोहिग्याओं की दुर्दशा से हर कोई वाकिफ है, इन्हीं के मद्दोनजर सुरक्षा परिषद ने म्यांमार में उनके सुरक्षा संबंधी पहलुओं पर सवाल खड़ा किया है।

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वहीं म्यांमार सरकार ने बताया कि, “शनिवार को पांच सदस्यीय परिवार को म्यांमार वापसी आने पर पहचान पत्र प्रदान किया गया हैं। यह रोहिंग्या संकट के बाद घर वापसी करने वाला पहला परिवार है।”

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गौरतलब है कि म्यांमार में रोहिग्याओं पर सेना द्वारा अत्याचार और आक्रामकता को संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद ने जातीय सफाया करार दिया था।

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लेकिन सुरक्षा के प्रति आश्वस्त करते हुए म्यांमार की सरकार ने बताया कि “वह रखाइन प्रांत में रोहिंग्या उग्रवादियों के ख़िलाफ़ न्यायसंगत अभियान चला रही है। जिसके तहत म्यामांर की अदालत ने अभी तक 10 रोहिंग्याओं की हत्या में आरोपी सात सैनिकों को कारावास की सजा सुनाई है।”

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