यहां होती है आग की बारिश, जानिए इसके बारे में !

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क्या आपने कभी आग की बारिश देखी है नहीं ना, लेकिन आज हम आपको एक ऐसा मामला बताएंगे जिसको जानने के बाद में आप भी चौंक जाएंगे । बताया जा रहा है हाल ही में, गाजियाबाद में साहिबाबाद रेलवे स्टेशन पर बेहद अजीब नजारा देखने को मिला । गुरुवार रात यहां बारिश के दौरान आग के गोले जैसी चीज गिरने से इलाके में हड़कंप मच गया । आग के गोले गिरने से वहां काफी तेज रौशनी का नजारा बन गया । ये सब कुछ करीब 10 मिनट तक चलता रहा । डरे सहमे लोगों ने फौरन पुलिस और फायर डिपार्टमेंट को फोन कर इसकी सूचना दी । घटनास्थल पर से मलबे भी पाए गए हैं । जब फायर डिपार्टमेंट भी आग को नहीं बुझा पाई तो लोगों में अफवाह और तेज फैल गई ।

जानकारों का भी मानना है कि किसी खगोलीय घटना के बाद आसमान से ये उल्कापिंड गिरे हैं । स्थानीय लोगों ने बताया कि नीचे गिरा आग का गोला तेज धधक रहा था, उसकी आग इतनी तेज थी कि बारिश के बाद भी वह नहीं बुझ रहा था । सुबह खबर फैलने पर लोगों की भीड़ इकट्ठी हो गई । इन टुकडों को पानी में डालने पर उससे सफेद झाग निकल रहा था ।

 

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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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