Delhi में हार्ले डेविडसन के एजेंसी में लगी आग

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पश्चिमी दिल्ली के मोती नगर इलाके में हार्ले डेविडसन मोटरसाइकिल एजेंसी के कार्यालय में शनिवार तड़के आग लग गई। अग्निशमन विभाग के अधिकारियों ने कहा कि चार लोगों को आग से बचाया गया। आग देर रात करीब 1.36 बजे आग लगी और उस पर नियंत्रण पाने में चार घंटे लग गए।

वहीं इमारत की तीसरी मंजिल पर एक नाइट क्लब भी है और छत का उपयोग रेस्तरां के लिए किया जाता है। वहीं नाइट क्लब ‘माक्र्ज’ के पास अग्निशमन विभाग का एनओसी नहीं है।

दिल्ली फायर सर्विस के निदेशक अतुल गर्ग ने कहा, “आग जाहिर तौर पर पहली और दूसरी मंजिल में लगी। प्लास्टिक सामग्री, ऑटो ग्लास, विंड गैस भंडारण क्षेत्र आग से प्रभावित हुए हैं। भूतल और बेसमेंट का कुछ हिस्सा भी आग से प्रभावित हुआ।”

गर्ग ने आगे कहा, “बेसमेंट का प्रयोग प्लास्टिक सामग्री के भंडारण के लिए किया जा रहा था।”

घटनास्थनल पर कुल 25 फायर टेंडर भेजे गए। अग्निशमन विभाग ने कहा कि आग पर करीब 5.50 बजे काबू पाया गया। बचाए गए चार लोगों में एक महिला भी शामिल है, सभी की उम्र 20 के आसपास है।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस

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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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