चार साल के बच्चे की तरह खाते हैं फिन वोल्फहार्ड

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‘स्ट्रेंजर थिंग्स’ से चर्चा में आए अभिनेता फिन वोल्फहार्ड ने इस बात को स्वीकारा कि वह एक चार साल के बच्चे की तरह से खाते हैं। फीमेल फस्र्ट डॉट को डॉट यूके की रिपोर्ट के मुताबिक, ऑब्जर्वर समाचार पत्र को दिए गए एक साक्षात्कार में फिन ने अपने खान-पान से संबंधित आदतों के बारे में बात कीं।

उन्होंने कहा, “मैं अब भी एक चार साल के बच्चे की तरह खाता हूं, जो कि एक अच्छी बात नहीं है जब आप लगातार ट्रैवल करते रहते हैं और अपनी डायट की वजह से खराब महसूस कर रहे होते हैं।”

द डफर ब्रदर्स द्वारा निर्देशित ‘स्ट्रेंजर थिंग्स’ में फिन ने माइक व्हीलर के किरदार को निभाया था। ये विल, माइक, डस्टिन और लुकास नामक चार दोस्तों की कहानी है, जिसमें वह इलेवन नामक एक लड़की से मिलते हैं, जिसके पास अपनी कुछ विशेष मनोवैज्ञानिक क्षमताएं हैं जिसकी मदद से वे एक एलियन से अपने शहर को बचाने का प्रयास करते हैं।

न्यजू स्त्रोत आईएएनएसफिन

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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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