वन-नेशन-वन-कार्ड का अंतिम परीक्षण 3-4 महीनों में : अमिताभ कांत

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देश में जल्द ही सभी तरह प्रकार की सार्वजनिक परिवहन सेवाओं का इस्तेमाल एक स्मार्टकार्ड के जरिए करना संभव होगा, क्योंकि वन-नेशन-वन-कार्ड का अंतिम परीक्षण अगले कुछ महीनों में पूरा हो जाएगा। नीति आयोग के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अमिताभ कांत ने गुरुवार को यह बात कही। उन्होंने कहा कि सभी हितधारकों के परामर्श के बाद वन-नेशन-वन-कार्ड नीति का बहुत सारा काम पूरा हो चुका है।

कांत ने यहां मीडिया को संबोधित करते हुए कहा, “बैंक-एंड टेक्नोलॉजी का सारा काम पूरा हो चुका है और संभवत: अगले तीन-चार महीनों में हम इसकी अंतिम परीक्षण करने की स्थिति में होंगे और यह परीक्षण रेल, मेट्रो, और बसों में किया जाएगा।”

उन्होंने कहा कि इसके पीछे का विचार यह है कि स्मार्ट कार्ड से मुंबई में यात्रा करनेवाला व्यक्ति उत्तर प्रदेश के दूरदराज इलाके में भी उसी कार्ड से यात्रा कर सके। उन्होंने कहा, “यही कार्ड डेबिट या क्रेडिट कार्ड के रूप में भी काम करेगा।”

कांत ने कहा, “इस काम से कई एजेंसियां जु़ड़ी हैं, जिसमें सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ एडवांस्ड कंप्यूटिंग, बैंक और शहरी विकास मंत्रालय शामिल है। इसमें बड़ी संख्या में प्रौद्योगिकी का काम शामिल है। हमने कई दौर की बैठकें की हैं और सभी मंत्रालय इसमें शामिल है।”

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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