फिल्म निर्माता अनिल सूरी का कोरोना से निधन

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बॉलीवुड फिल्म निर्माता अनिल सूरी का कोविड-19 से संक्रमित थे, उनका निधन हो गया। वह 77 वर्ष के थे। फिल्म फेयर डॉट कॉम के अनुसार, अनिल के निधन के समाचार की पुष्टि उनके भाई राजीव सूरी ने की। उन्होंने बताया कि तबीयत ज्यादा बिगड़ने पर फिल्म निर्माता को पहले लीलावती, फिर हिंदुजा अस्पताल ले जाया गया। दोनों चिकित्सा संस्थानों में उन्हें बेड देने से मना किया गया।

वेबसाइट की खबर में यह भी कहा गया है कि अंत में उन्हें एडवांस मल्टीस्पेशलिटी हॉपिटल ले जाया गया। बुधवार को उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया था, लेकिन शुक्रवार की शाम लगभग 7 बजे उन्होंने अंतिम सांस ली।

अनिल सूरी की बनाई सन् 1978 की फिल्म ‘कर्मयोगी’ उन दिनों हिट हुई थी। इस फिल्म में राज कपूर, जितेंद्र और रेखा ने अभिनय किया था। उनकी बनाई ‘राज तिलक’ भी सिनेमाघरों में खूब चली थी। इसमें सुनील दत्त, राज कुमार, हेमा मालिनी, धर्मेद्र, रीना रॉय, सारिका और कमल हासन ने अभिनय किया था।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस

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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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